जालौन , जनवरी 15 -- उत्तर प्रदेश में जालौन जिले के कदौरा कस्बे में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब नहर के माइनर में भारी मात्रा में सरकारी दवाएं बहती हुई मिलीं।

विभागीय सूत्रों के अनुसार इन दवाओं की अनुमानित कीमत करीब पांच से सात लाख रुपये बताई जा रही है। माइनर में मिली दवाओं में कैल्शियम, खांसी की सिरप और आयरन की गोलियां शामिल बताई गई हैं, जो नई हालत में थीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब उन्होंने नहर के माइनर के किनारे और पानी में दवाओं का ढेर देखा, तो तुरंत इसकी सूचना अधिकारियों को दी। दवाओं के पैकेट और बोतलों पर स्वास्थ्य विभाग से संबंधित नाम और निशान अंकित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ये सरकारी आपूर्ति की दवाएं हैं। दवाओं का इस तरह खुलेआम नहर में फेंका जाना लोगों के लिए चौंकाने वाला और आक्रोश पैदा करने वाला है।

ग्रामीणों और नगरवासियों का कहना है कि एक ओर सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में अक्सर दवाओं की कमी की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर लाखों रुपये की दवाओं को नहर में बहा देना गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि किसी स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी या जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा जानबूझकर इन दवाओं को नष्ट करने के बजाय माइनर में फेंक दिया गया है।

यह भी आशंका जताई जा रही है कि दवाओं को एक्सपायरी से पहले नष्ट करने के तय नियमों का उल्लंघन किया गया है, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को खतरा हो सकता है। मामले की जानकारी मिलने पर मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) देवेंद्र भिटौरिया को अवगत कराया गया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई।

सीएमओ देवेंद्र भिटौरिया ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी सीएमओ के नेतृत्व में एक जांच टीम को मौके पर भेजा गया है। टीम द्वारा पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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