जालंधर , मार्च 18 -- पंजाब में जालंधर जिला मजिस्ट्रेट-सह-उपायुक्त डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने जन सुरक्षा और बाढ़ के खतरे को रोकने के मद्देनजर बुधवार को जिले की नदियों और उनके प्राकृतिक बहाव वाले क्षेत्रों में बड़े पेड़ लगाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।
डॉ अग्रवाल ने कहा कि सतलुज नदी और उसकी सहायक नदियों/चों के प्राकृतिक रास्तों , फ्लड प्लेन या पानी के बहाव वाले क्षेत्रों में बिना पूर्व अनुमति के सफेदा , पॉपुलर और अन्य बड़े पेड़ लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यह आदेश सभी प्रकार की भूमि पर लागू होगा, चाहे वह सरकारी हो, पंचायती हो या किसी निजी व्यक्ति के स्वामित्व में हो। ये आदेश आगामी 12 मई तक प्रभावी रहेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा नदियों के अंदरूनी हिस्सों और बहाव क्षेत्रों में बड़े पेड़ लगाए जा रहे हैं। उन्होने कहा कि बड़े पेड़ों के कारण पानी की प्राकृतिक निकासी बाधित होती है। मानसून के दौरान बहाव रुकने से आसपास के इलाकों में बाढ़ आने की संभावना बढ़ जाती है। नदियों के प्राकृतिक मार्ग से छेड़छाड़ करना जन सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि नदी के अंदरूनी हिस्से में ऐसी गतिविधियां पंजाब कैनाल एवं ड्रेनेज एक्ट, 2023 के तहत एक दंडनीय अपराध है। इन आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि नदी के बहाव वाले क्षेत्र में किसी भी प्रकार की रुकावट जन सुरक्षा के लिए खतरा है। बारिश के मौसम में जान-माल की हानि को रोकने के लिए पानी की प्राकृतिक निकासी को बनाए रखना अनिवार्य है।
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