श्रीनगर , अगस्त 21 -- कश्मीर के मुख्य धर्मगुरु और हुर्रियत अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने शुक्रवार को दावा किया कि ऐतिहासिक जामिया मस्जिद की आवाज दबाने की कोशिशें और उस पर पाबंदियां लगाना राज्य की नीति का हिस्सा लगता है।
इस ऐतिहासिक मस्जिद के मिंबर (मस्जिद का मंच) ने हमेशा टकराव के बजाय लोगों के हकों, फ़र्ज़ों, आपस में मिलकर रहने और बातचीत का समर्थन किया है।
लगभग दो सप्ताह बाद ऐतिहासिक जामिया मस्जिद श्रीनगर में शुक्रवार की नमाज के लिए आये जनसमूह को संबोधित करते हुए मीरवाइज ने कहा कि उन्हें मस्जिद में खुतबा देने से रोका गया और नक्शबंद साहब दरगाह में भी लोगों को संबोधित करने की अनुमति नहीं दी गयी। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच लौटने और उन्हें संबोधित करने का अवसर मिलना उनके लिए अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है।
मीरवाइज ने कहा, "बदकिस्मती से मिंबर पर पाबंदियां लगाना और इसे खामोश करने का प्रयास करना इस समय राज्य नीति का हिस्सा लगता है।" उन्होंने कहा कि यह समय सब्र रखने और हर संभव तरीके से नेक काम जारी रखने का है। ऐसी पाबंदियां लगाने वालों को संबोधित करते हुए मीरवाइज ने कहा कि वे शायद कश्मीरी समाज में जामिया मस्जिद के मिंबर की ऐतिहासिक भूमिका से वाकिफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस मिंबर ने पीढ़ियों से लोगों को शिक्षित करने और समाज को मजहबी और अखलाकी बुनियाद पर ढालने में अहम भूमिका निभाई है, साथ ही लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक किया है। उन्होंने कहा, "जब भी जरूरत पड़ी, यह मिंबर लोगों की पुरजोर आवाज बना, उनकी फिक्र को सामने रखा और उनकी ख्वाहिशों की वकालत की।"मीरवाइज ने कहा कि इस मिंबर ने विभिन्न फिरकों के बीच पुरअमन भाईचारे को बढ़ावा दिया और अल्पसंख्यकों के हक के लिए भी मजबूती से आवाज उठायी। इसका रुख हमेशा इस्लामी तालीम से जुड़ा, उसूलों पर कायम और गरिमापूर्ण रहा है, जिसमें टकराव के बजाय बातचीत और शख्सियतों के बजाय मुद्दों को तरजीह दी गयी है।
मीरवाइज ने कहा, "इन्शाअल्लाह, जब भी मौका मिलेगा, आगे भी ऐसा ही करता रहेगा। यह मेरे बुजुर्गों की विरासत है और जम्मू-कश्मीर के लोगों की साझी अमानत है।"गौरतलब है कि मीरवाइज को अक्सर नजरबंद किया जाता है या उनकी आवाजाही पर पाबंदियां लगायी जाती हैं, खासकर शुक्रवार के दिन।
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