मुंबई , जुलाई 07 -- शिवसेना (यूबीटी) के विधान पार्षद अनिल परब ने मंगलवार को महाराष्ट्र की जाति जांच समितियों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए दावा किया कि मुंबई में जाति वैधता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए 50 लाख रुपये तक की रिश्वत की वसूली की जा रही है।

पूर्व मंत्री ने महाराष्ट्र नगर निगम (संशोधन) विधेयक पर बहस के दौरान विधान परिषद को संबोधित करते हुए एक व्यवस्थित भ्रष्टाचार के जरिए जाति सत्यापन की संवैधानिक प्रक्रिया को शेयर बाजार में बदल देने का आरोप लगाया, जहां आवेदन जमा करने की समय-सीमा जैसे-जैसे नजदीक आती है, कीमतें वैसे-वैसे बढ़ती जाती हैं।

श्री परब ने कहा, "मुंबई में जाति वैधता प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए 50 लाख रुपये की एक तय 'दर' है।" उन्होंने इस घोटाले को उच्च-स्तरीय अधिकारियों और राजनेताओं की जानकारी में किए जाने की बात कही। वरिष्ठ विधायक ने समिति के सदस्यों द्वारा जानबूझकर आवेदनों को आखिरी समय तक लंबित रखने की बात कही ताकि उम्मीदवारों पर रिश्वत देने का दबाव बनाया जा सके।

उन्होंने समितियों के तीन तरह की रिपोर्ट तैयार करने का दावा किया, जिसमें एक वैधता देने वाली, दूसरी उसे खारिज करने वाली और तीसरी 'आगे की जांच' की मांग करने वाली। उन्होंने आखिरी वाली रिपोर्ट का इस्तेमाल परेशान उम्मीदवारों से पैसे ऐंठने के लिए किए जाने का आरोप लगाया।

श्री परब ने मुंबई नगर निकाय चुनाव प्रक्रिया में एक चिंताजनक चलन की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस प्रशासनिक भ्रष्टाचार का इस्तेमाल चुनावी नतीजों में हेरफेर करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि हारने वाले उम्मीदवार अक्सर जाति जांच समितियों को 'मैनेज' करके अपने जीतने वाले प्रतिद्वंद्वियों को अयोग्य घोषित करवा देते हैं, जिसमें असल में जनता के जनादेश को दरकिनार कर दिया जाता है।

मंत्री संजय शिरसाट ने आरोपों का जवाब देते हुए प्रशासन का बचाव किया।

गौरतलब है कि इन दावों ने राज्य की जाति सत्यापन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने इन समितियों के कामकाज की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है।

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