रांची , सितंबर 12 -- झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि पूरे देश में जनगणना की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।

प्रथम चरण में मकानों की गणना की जा चुकी है तथा अब दूसरे चरण में व्यक्तियों की गणना की जानी है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि जनगणना के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की जातिगत पहचान और उनकी वास्तविक जनसंख्या का स्पष्ट एवं वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जाए।

श्री कमलेश एवं कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने आज कांग्रेस भवन, रांची में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए देश में चल रही जनगणना तथा पिछड़े वर्गों के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

श्री कमलेश ने कहा कि झारखंड जैसे राज्यों के लिए जातिगत जनगणना के आंकड़े अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। राज्य में पिछड़े वर्गों की आबादी बड़ी संख्या में है, लेकिन सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े इस वर्ग को आज भी उनकी जनसंख्या के अनुरूप अधिकार और हिस्सेदारी का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

श्री कमलेश ने कहा कि मंडल कमीशन की सिफारिशों के आधार पर पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है, लेकिन झारखंड में पिछड़े वर्गों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल रहा है। राज्य के सात जिलों में पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण शून्य होना सामाजिक न्याय की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने स्पष्ट मांग करते हुए कहा कि जनगणना प्रपत्र में अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एससी) की तरह ही अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की स्पष्ट एवं अलग पहचान के लिए अलग कोड की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही राज्यों में मान्य पिछड़ा वर्ग की जातियों को सूचीबद्ध कर जनगणना में दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि उनकी वास्तविक संख्या का प्रमाणिक आंकड़ा सामने आ सके।

श्री कमलेश ने कहा कि इसी मांग को लेकर 16 सितंबर को ओबीसी मोर्चा बापू वाटिका से राजभवन तक मार्च करेगा और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगा। वहीं, एमएमडीआर कानून एवं खनिज संसाधनों से जुड़े मुद्दों तथा चंदा चोरी के विरोध में प्रदेश कांग्रेस कमिटी 26 सितंबर को शहीद चौक से राजभवन तक मार्च करेगी और ज्ञापन सौंपेगी। इसके बाद 5 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक सभी प्रखंड मुख्यालयों में विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।

कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि इस बार जनगणना में जाति दर्ज करने के लिए पूर्व निर्धारित ड्रॉपडाउन सूची अथवा अलग से ओबीसी का विशेष कॉलम उपलब्ध नहीं कराया गया है, बल्कि व्यक्ति द्वारा स्वयं घोषित जाति दर्ज करने के लिए एक खुला कॉलम रखा गया है। ऐसे में जातियों की पहचान और आंकड़ों की शुद्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने कहा कि 2011 की सामाजिक-आर्थिक एवं जातिगत जनगणना (एसईसीसी) के जातिगत आंकड़े अन्य परिणामों के साथ सार्वजनिक नहीं किए गए। वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामों में भी इन आंकड़ों में तकनीकी समस्याओं और विसंगतियों का उल्लेख किया गया था। केंद्र सरकार ने इन आंकड़ों को त्रुटिपूर्ण और उपयोग के योग्य नहीं होने की बात कही थी। ऐसी स्थिति में आशंका है कि यदि आगामी जनगणना में उचित व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में भी इसी प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

श्री यादव ने कहा कि जब तक पिछड़े वर्गों की वास्तविक जनसंख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही एवं विस्तृत आंकड़ा सामने नहीं आएगा, तब तक उनके लिए प्रभावी नीतियां, कल्याणकारी योजनाएं और आरक्षण से जुड़े निर्णय वैज्ञानिक, न्यायसंगत एवं वास्तविक जरूरतों के अनुरूप लेना कठिन होगा।

उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और सभी वर्गों की उचित भागीदारी सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए केंद्र सरकार को जनगणना प्रपत्र में ओबीसी के लिए स्पष्ट प्रावधान करते हुए अलग कोड सुनिश्चित करना चाहिए।

नवनियुक्त ओबीसी के प्रदेश अध्यक्ष निशांत जायसवाल ने ने कहा कि पिछड़े वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुरूप सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करना सामाजिक न्याय की दिशा में आवश्यक कदम है। केंद्र सरकार को इस विषय पर तत्काल स्पष्ट निर्णय लेते हुए आगामी जनगणना में ओबीसी की जातिगत पहचान एवं विशेष कोड की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। तभी जनगणना के वास्तविक उद्देश्यों की पूर्ति और सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूती मिल सकेगी।

प्रेस वार्ता में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सह मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुजनी प्रदेश संयोजक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के डॉक्टर तौसीफ सोशल मीडिया के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह प्रदेश प्रवक्ता उज्जवल प्रकाश तिवारी प्रदेश महासचिव राकेश किरण महतो भी उपस्थित थे।

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