पटना , नवंबर 02 -- िहार में 11 नवंबर को दूसरे चरण के 122 सीटों पर होने वाले चुनाव में जहानाबाद जिले की सभी तीन सीटों पर महागठबंधन और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवारों के बीच रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा।
जहानाबाद जिले की सभी तीन सीटें जहानाबाद, घोसी और मुखदुमपुर (सुरक्षित) पर महागठबंधन का का कब्जा है। जहानाबाद और मखदुमपुर (सुरक्षित) पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और घोसी पर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा माले) का कब्जा है।
जहानाबाद विधानसभा सीट पर इस बार के चुनाव में रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा। पूर्व विधायक मुंद्रिका सिंह यादव के पुत्र और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) विधायक इस बार अरवल जिले की कुर्था से चुनाव लड़ रहे हैं। राजद ने यहां पूर्व सांसद जगदीश शर्मा के पुत्र और पूर्व विधायक राहुल शर्मा को चुनावी दंगल में उतारा है। राहुल शर्मा ने हाल ही में जनता दल यूनाईटेड (जदयू) से नाता तोड़कर राजद का दामन थामा है।वहीं जदयू ने यहां पूर्व सांसद चंद्रेश्वर चंद्रवंशी पर भरोसा जताते हुये उन्हें चुनावी अखाड़े में उतार दिया है। वर्ष 2020 में राजद के सुदय यादव ने जदयू उम्मीदवार और तत्कालीन शिक्षा मंत्री और घोसी के तत्कालीन विधायक कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा को मात दी थी। जहानाबाद से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से टिकट नहीं मिलने से नाराज इंदु कश्यप ने लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा। मुंद्रिका सिंह यादव ने यहां दो बार वर्ष 1995 और 2015 में जीत हासिल की है। उनके निधन के बाद वर्ष 2018 में हुये उप चुनाव में उनके पुत्र सुदय यादव ने जीत हासिल की थी। जहानाबाद की राजनीति में यादव और भूमिहार जातियों का वर्चस्व रहा है, और यही समीकरण यहां के चुनाव परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित करते हैं। जहानबाद सीट पर 11 प्रत्याशी चुनावी दंगल में उतरे हैं।
घोसी विधानसभा सीट से भाकपा माले ने विधायक रामबली सिंह को चुनावी दंगल में उतारा है, जो दूसरी बार यहां अपना 'बल' दिखाने के लिये बेताब हैं। वहीं जदयू ने यहां पूर्व सांसद अरूण कुमार के पुत्र ऋतुराज कुमार को प्रत्याशी बनाया है। वर्ष 2020 में भाकपा माले उम्मीदवार रामबली सिंह ने जदयू उम्मीदवार राहुल शर्मा को सियासी संग्राम में मात दी थी।घोसी विधानसभा सीट पर जगदीश शर्मा का वर्चस्व रहा है। वर्ष 1977 से 2015 तक जगदीश शर्मा और उनके परिवार के सदस्यों ने यहां जीत दर्ज की।जगदीश शर्मा ने घोसी की राजनीति पर लगभग चार दशक तक अपना एकाधिकार बनाए रखा। 1977 से 2009 तक जगदीश शर्मा लगातार आठ बार विधायक चुने गए। जगदीश शर्मा वर्ष 2009 में जहानाबाद से सांसद चुने गये। जगदीश शर्मा के सांसद बनने के बाद रिक्त हुयी घोसी विधानसभा सीट पर हुये उपचुनाव में उनकी पत्नी शांति शर्मा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विजयी हुईं और 2010 के अगले विधानसभा चुनाव में उनके बेटे राहुल शर्मा ने जदयू के टिकट पर जीत दर्ज की। हालांकि वर्ष 2015 में राहुल शर्मा को हार का सामना करना पउ़ा। करीब चार दशक में यह पहली बार है कि इस सीट पर जगदीश शर्मा के परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ रहा है।घोसी विधानसभा सीट पर 11 प्रत्याशी चुनावी अखाड़े में जोर आजमा रहे हैं।
मखदुमपुर (सुरक्षित) से राजद ने विधायक सतीश कुमार को बेटिकट कर दिया है। राजद ने यहां पूर्व विधायक सूबेदार दास को प्रत्याशी बनाया है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के टिकट पर जिला परिषद की चेयर मैन रानी कुमारी प्रत्याशी हैं।वर्ष 2020 में राजद के सतीश कुमार ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) उम्मीदवार और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी (अभी केन्द्रीय मंत्री) के दामाद देवेंद्र कुमार को पराजित कर दिया था। इससे पूर्व वर्ष 2015 के चुनाव में राजद प्रत्याशी सूबेदार दास ने हम उम्मीदवार जीतन राम मांझी को परास्त कर दिया था।वर्ष 2010 में जीतन राम मांझी ने यहां जीत दर्ज की थी। मखदूमपुर बराबर गुफाओं के लिए प्रसिद्ध है।मखदुमपुर विधानसभा सीट पर हर बार सत्ता और विपक्ष दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर रहती है। यहां से जीतन राम मांझी, पूर्व मंत्री सुखदेव प्रसाद वर्मा और पूर्व मंत्री बागी कुमार वर्मा जैसे दिग्गज चुनाव जीत चुके हैं। मखदुमपुर से वर्ष 2010 में विधायक रहते जीतन राम मांझी 2014 में बिहार के मुख्यमंत्री बने थे।कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राम जतन सिन्हा ने यहां तीन बार जीत हासिल की है।यही वजह है कि हर चुनाव में मखदुमपुर सीट पर रोमांच चरम पर रहता है। यहां का जातीय समीकरण भी अहम है, क्योंकि दलित, पासवान और मांझी समाज के वोटरों का बड़ा दबदबा है। इस सीट पर नौ प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे हैं।देखना दिलचस्प होगा कि क्या राजद एक बार फिर अपना किला बचा पाएगा, या फिर लोजपा रामविलास यहां जीत दर्ज करेगी।
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