नैनीताल , अप्रैल 09 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ऊधमसिंहनगर जिले की जसपुर तहसील के शिपका, मिलख शिपका और मनोरथपुर थर्ड गांवों को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने निर्देश दिए कि अगली सुनवाई से पहले राज्य सरकार यह स्पष्ट करे कि सिंचाई विभाग और वन विभाग के नोडल अधिकारियों की अगुवाई में गठित कमेटी की रिपोर्ट पर क्या निर्णय लिया गया है।

कोर्ट ने यह भी पूछा कि यदि संबंधित रिपोर्ट अभी तक शासन तक नहीं पहुंची है, तो इसके कारण भी स्पष्ट किए जाएं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि नोडल अधिकारियों द्वारा तैयार रिपोर्ट अभी तक शासन को नहीं भेजी गई है।

खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देशित किया कि वह यह भी बताए कि रिपोर्ट भेजी गई है या नहीं, और यदि भेजी गई है तो उस पर क्या निर्णय लिया गया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई रिपोर्ट प्रस्तुत होने के तीन सप्ताह बाद निर्धारित की है।

याचिका के अनुसार, मनोरथपुर थर्ड निवासी मुख्यतियार सिंह और पंजाब सिंह ने कहा है कि वर्ष 1958 में तुमड़िया डैम के निर्माण के कारण इन गांवों की लगभग 350 हेक्टेयर राजस्व भूमि सरकार ने अधिग्रहित कर ली थी। इसके बाद ग्रामीणों को वन की भूमि पर बसाया गया, जिससे ये गांव राजस्व ग्राम की श्रेणी से बाहर हो गए।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को इस संबंध में कुछ औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए थे लेकिन राज्य सरकार उन औपचारिकताओं को पूरा करने में नाकाम रही है और ये गांव आज भी वन ग्राम का दंश झेल रहे हैं।

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