जशपुर , जुलाई 28 -- छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के बादलखोल वन अभ्यारण्य क्षेत्र स्थित साहीडांड वन विभाग के आवासीय परिसर में सेमर के दो पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मामले में पेड़ों की कटाई, लकड़ियों के परिवहन और नीलामी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों और ग्राम पंचायत के बयानों में भी विरोधाभास सामने आया है। इस बीच अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही है।

जानकारी के अनुसार, पंचायत क्षेत्र में किसी भी पेड़ की कटाई के लिए ग्राम पंचायत का प्रस्ताव, वन विभाग का अभिमत तथा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक होती है। इसके अलावा लकड़ियों के परिवहन के लिए ट्रांजिट परमिट तथा निस्तारण के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना अनिवार्य है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मधुमक्खियों के छत्ते हटाने की आड़ में सेमर के दो पेड़ों की कटाई कर लकड़ियों का बिना ट्रांजिट परमिट परिवहन किया गया और बाद में उनकी नीलामी किए बिना बेच दिया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

वनपाल रामसाय केरकेट्टा ने बताया कि साहीडांड वन परिसर में सेमर के दो पेड़ों की कटाई हुई है। लकड़ियों का परिवहन भी किया गया लेकिन उनकी नीलामी की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। उन्होंने यह भी कहा कि पेड़ों की कटाई के संबंध में उन्हें कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ था।

साहीडांड वन परिक्षेत्र में पदस्थ दरोगा हीरामनी पैंकरा ने बताया कि साहीडांड आवासीय परिसर बगीचा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आता है, जबकि शेष क्षेत्र बादलखोल वन अभ्यारण्य का हिस्सा है। उनके अनुसार दोनों पेड़ों पर मधुमक्खियों के छत्ते लगे हुए थे। उन्होंने कहा कि पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग से न तो कोई अभिमत लिया गया और न ही कोई लिखित अनुमति प्राप्त की गई।

पंकज.अभयवार्तावहीं, बादलखोल वन अभ्यारण्य, नारायणपुर के डिप्टी रेंजर सुरेंद्र प्रधान ने बताया कि घटना के समय वह अवकाश पर थे। अधीनस्थ कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत द्वारा मधुमक्खियों की समस्या को दूर करने के उद्देश्य से वन विभाग के आवासीय परिसर में पेड़ों की कटाई कराई गई। हालांकि उन्होंने अनुमति, वन विभाग के अभिमत, परिवहन और नीलामी संबंधी प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने की बात कही।

दूसरी ओर, साहीडांड ग्राम पंचायत सचिव उदयनारायण यादव ने वन विभाग के इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत से पेड़ों की कटाई के लिए कोई प्रस्ताव जारी नहीं किया गया और न ही पंचायत द्वारा पेड़ों की कटाई कराई गई।

इस संबंध में एसडीएम प्रदीप राठिया ने बताया कि साहीडांड में पेड़ों की कटाई के लिए उनके कार्यालय से कोई अनुमति जारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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