नयी दिल्ली , मई 31 -- देश भर में जल संसाधनों के आकलन, निगरानी और प्रबंधन के लिए उपग्रह -आधारित अनुप्रयोगों और उन्नत तकनीकों को मज़बूत करने के लिए जल शक्ति मंत्रालय और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (वार्ता) इसरो समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं।

जल शक्ति मंत्रालय पहली जून को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में 'जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पर राष्ट्रीय कार्यशाला' का आयोजन करने जा रहा है जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को जोड़ा गया है । मंत्रालय के अनुसार यह कार्यशाला सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत, वैज्ञानिक संस्थानों, स्टार्टअप्स और तकनीकी संगठनों के प्रमुखों को एक मंच पर लाएगी, ताकि भारत की जल अनुसंधान पारिस्थितिकी को मज़बूत किया जा सके और सतत जल प्रबंधन के लिए नवाचार-आधारित समाधानों को गति दी जा सके।

कार्यशाला में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह, जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, और अंतरिक्ष विभाग के सचिव व इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव, पेय जल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव, जल संसाधन विभाग, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग के सचिव, तथा राष्ट्रीय जल मिशन के अपर सचिव व मिशन निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे और संयुक्त रूप से इसका उद्घाटन करेंगे।

इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण जल के लिए उच्च-प्रभाव वाले क्षेत्रों में प्रगति का मिशन - की शुरुआत होगी। यह जल शक्ति मंत्रालय और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन ( एएनआरएफ) की एक संयुक्त पहल है। इसका उद्देश्य जल संसाधन प्रबंधन, पेयजल, जलवायु अनुकूलन और जल-उपयोग दक्षता जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अत्याधुनिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है। इस पहल के तहत अनुसंधान प्रस्तावों के लिए 'ओपन कॉल' (खुला आमंत्रण) की भी घोषणा की जाएगी।

मंत्रालय जल क्षेत्र में उत्पादों और प्रोटोटाइप के विकास में सहायता के लिए ' भारत-विन पोर्टल' के तहत स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए भी 'ओपन कॉल' शुरू करेगा। इस कार्यशाला में ' जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन' की भी शुरुआत होगी। यह सहभागी डिजिटल मंच है, जिसे नागरिकों, संस्थानों और स्थानीय निकायों को जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण की योजनाओं को दस्तावेज़ित करने और प्रदर्शित करने में सक्षम बनाकर, समुदाय-नेतृत्व वाले जल संरक्षण प्रयासों को मज़बूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

जल शक्ति मंत्रालय और इसरो, जल संसाधनों के आकलन, निगरानी और प्रबंधन के लिए उपग्रह -आधारित अनुप्रयोगों और उन्नत तकनीकों को मज़बूत करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।

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