चंडीगढ़ , जून 20 -- हरियाणा सरकार ने प्रदेश को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 5,714 करोड़ रुपये की लागत वाली 'जल संरक्षित हरियाणा' परियोजना को मंजूरी दी है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि परियोजना के लिए वर्ल्ड बैंक ने 4,000 करोड़ रुपये के ऋण को स्वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना वर्ष 2026 से 2032 तक चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।

परियोजना के तहत राज्य को 15 जल प्रबंधन क्लस्टरों में विभाजित किया गया है, जिनका कुल क्षेत्रफल 48.94 लाख एकड़ है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और सिंचाई प्रबंधन के लिए आधुनिक एवं डिजिटल प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने गांव स्तर पर जल समितियों के गठन और खालों के निर्माण व रखरखाव में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

योजना के अंतर्गत 678 नहरों का पुनर्वास किया जाएगा। साथ ही 620 वाटर कोर्स (खालों) का पुनरुद्धार, 120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं का क्रियान्वयन तथा 2 लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि का सुधार किया जाएगा। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 5 लाख एकड़ क्षेत्र में सीधी धान बुआई और 1.12 लाख एकड़ में फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि भिवानी, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी और सिरसा जिलों में 147 नई जल संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा, जिससे भूजल स्तर को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों से उपचारित जल का पुनः उपयोग कर लगभग 28 हजार एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना हरियाणा के जल प्रबंधन में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित होगी और भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं सतत जल संसाधन सुनिश्चित करेगी।

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