जयपुर , जून 02 -- राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने वर्षा जल के अधिकतम संचयन और जल स्रोतों के संरक्षण में जनभागीदारी को को एक महत्वपूर्ण भूमिका बताया है और कहा है कि जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल संसाधनों के संरक्षण एवं सिंचाई व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
श्री रावत वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत मंगलवार को दौसा जिले में स्थित कालाखो बांध पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने जल पूजन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं अच्छी वर्षा की कामना की। इस अवसर पर महिलाओं द्वारा कलश यात्रा निकाली गयी तथा जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया गया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पौधारोपण भी किया गया।
उन्होंने बताया कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) के माध्यम से कालीसिंध, चंबल एवं पार्वती नदियों का जल क्षेत्र तक पहुंचेगा, जिससे दौसा जिले सहित पूर्वी राजस्थान में जल उपलब्धता बढ़ेगी तथा किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा। उन्होंने अधिकारियों को वर्षा ऋतु से पूर्व जल स्रोतों, नहरों एवं एनीकटों की आवश्यक मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।
उन्होंने किसानों की मांग पर पुरानी केनाल प्रणाली की मरम्मत कराने तथा नहरों एवं जल मार्गों पर हुए अतिक्रमण हटाने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिये। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा सिंचाई तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाये जाएंगे।
श्री रावत ने जल संरक्षण के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर अधिकाधिक पौधारोपण करने का आह्वान करते हुए कहा कि जल और पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देना समय की आवश्यकता है।
इस अवसर पर सिकराय विधायक विक्रम बंशीवाल ने भी जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन एवं पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने नागरिकों से जल बचाने तथा अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लेने की अपील की। इस दौरान श्री बंशीवाल ने ईआरसीपी योजना में शेष बांधों को भी जोड़ने तथा कालाखो बांध पर आवश्यक विकास कार्य कराने की मांग की।
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