नयी दिल्ली , सितंबर 02 -- छत्तीसगढ़ ने बारिश के पानी को सहेजने और भू-जल पुनर्भरण के प्रयासों में देश में अपनी मजबूत पहचान बनाने के साथ ही 'जल संचय जनभागीदारी' और 'कैच द रेन' अभियान में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए तीसरे चरण में देश में पहला स्थान हासिल किया है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को यहां सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में राज्य की जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। सम्मेलन के 'कैच द रेन' सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने राज्य में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के संरक्षण से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी। कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल एवं विभिन्न राज्यों के जल संसाधन मंत्री भी उपस्थित रहे।

श्री साय ने देशभर में जल संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए हर राज्य का अपना 'कैच द रेन' प्लान, बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिए 'स्टेट वाटर अवार्ड्स', बीआईएसएजी-एन के माध्यम से जल संरचनाओं की मैपिंग और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हर तीन महीने समीक्षा का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि वह किसान के बेटे हैं और अपने गांव बगिया में स्वयं हल चलाकर खेती कर चुके हैं, इसलिए पानी की कीमत को करीब से समझते हैं। उन्होंने बताया कि देश के कुल क्षेत्रफल में करीब 4 प्रतिशत हिस्सेदारी वाला छत्तीसगढ़ 'जल संचय जन भागीदारी' अभियान में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। राज्य ने जल संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर किसानों, पंचायतों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से जनअभियान का रूप दिया है।

उन्होंने छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से शुरू हुए 'पांच प्रतिशत मॉडल' को जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण की अनोखी पहल बताया। इसके तहत किसान स्वेच्छा से अपनी जमीन का 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण के लिए उपलब्ध करा रहे हैं। इस भूमि पर बारिश के पानी को रोकने और उसे धीरे-धीरे जमीन के भीतर पहुंचाने के लिए जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। खेतों में बनायी गयी इन संरचनाओं में बारिश का पानी एकत्र होता है और धीरे-धीरे जमीन में समाहित होता है। इससे भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलने तथा सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि इस मॉडल में विभिन्न विभागों और योजनाओं के बीच समन्वय, जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित समीक्षा और जनभागीदारी को प्राथमिकता दी गयी है। जल सखी, जल मित्र, किसान, पंचायतें और स्थानीय समुदाय इसके प्रमुख भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने इन अनुभवों और सफल मॉडलों को देश के अन्य राज्यों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।

उल्लेखनीय है कि जल शक्ति मंत्रालय के 'जल संचय जन भागीदारी' अभियान के तीनों चरणों में छत्तीसगढ़ ने बेहतर प्रदर्शन किया है। पहले चरण में राज्य में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनायी गयी और छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा। दूसरे चरण में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गयी, जिनमें से 23 लाख 7 हजार 768 का काम पूरा हो चुका है। इस चरण में भी राज्य को देश में दूसरा स्थान मिला। तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। इस चरण में राज्य में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गयी हैं, जिनमें से 77 हजार 719 संरचनाएं पूरी हो चुकी हैं। इन संरचनाओं का मुख्य उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर बाहर जाने से रोकना और उसे जमीन के भीतर पहुंचाना है, जिससे भू-जल स्तर को बनाए रखने और बढ़ाने में मदद मिल सके।

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'कैच द रेन, जल जहां गिरे, वहीं संचित करें' के संदेश को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लागू किया जा रहा है। राज्य के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण की संरचनाएं तैयार की जा रही हैं।

शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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