नयी दिल्ली , सितम्बर 01 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार को जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करेंगे।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंगलवार को बताया कि दो दिन का यह सम्मेलन प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तावित विभागीय शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला है। इसका उद्देश्य टीम इंडिया की भावना को मजबूत करना, सहकारी संघवाद को गहरा करना और केंद्र तथा राज्यों के बीच करीबी सहयोग के माध्यम से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के प्रति सामूहिक स्वामित्व को बढ़ावा देना है। यह पहल महत्वपूर्ण क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर संयुक्त रूप से विचार-विमर्श करने तथा क्रियान्वयन और परिणामों में तेजी लाने के लिए एक मंच प्रदान करती है।

शिखर सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों के राजनीतिक नेतृत्व तथा वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इसमें प्रमुख प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने, क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों के समाधान और समयबद्ध कार्ययोजनाएं तैयार करने पर चर्चा होगी। इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय लक्ष्यों के लिए साझा जिम्मेदारी को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना है कि विचार-विमर्श से शासन तथा सेवा वितरण में मापनीय सुधार हों।

शिखर सम्मेलन में चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इनमें जल अवसंरचना परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन, जल संचय जन भागीदारी - कैच द रेन, पेयजल प्रणालियों के स्रोतों की स्थिरता और जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं का संचालन और रखरखाव शामिल है।

इन विचार-विमर्शों से जल अवसंरचना परियोजनाओं में तेजी लाने, जल संरक्षण में जन भागीदारी बढ़ाने, टिकाऊ पेयजल स्रोत सुनिश्चित करने तथा ग्रामीण पेयजल सेवाओं की विश्वसनीयता और जवाबदेही में सुधार के लिए ठोस और समयबद्ध कार्रवाइयां किए जाने की उम्मीद है।

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