नैनीताल , अप्रैल 27 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने जल विद्युत कंपनियों पर बिजली उत्पादन कर (जनरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी टैक्स) थोपने के मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि यह राज्य सरकार का विषय नहीं है है। यह केंद्र सरकार के अधिकार में आता है।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ ने विभिन्न हाइड्रो पावर कंपनियों के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि विद्युत उत्पादन पर कर लगाना राज्य सूची का विषय नहीं है, इसलिए उत्तराखंड सरकार द्वारा लगाया गया वाटर टैक्स असंवैधानिक है।

गौरतलब है कि इससे पहले एकलपीठ ने "उत्तराखंड वाटर टैक्स ऑन इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन एक्ट, 2012" को वैध ठहराते हुए विद्युत उत्पादन कंपनियों की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाइड्रो पावर कंपनियों की ओर से एकलपीठ के आदेश के खिलाफ विशेष अपील दायर की गई।

विशेष अपीलों पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी की खंडपीठ में सुनवाई हुई लेकिन खंडपीठ इस मामले में विभाजित नजर आयी और अलग-अलग मंतव्य दिये। इसके बाद मामले को पुनः विचार के लिए तीसरे न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की पीठ को संदर्भित किया गया, जिस पर आज अंतिम निर्णय सामने आया है।

मामले के अनुसार राज्य गठन के बाद उत्तराखंड सरकार ने नदियों पर जल विद्युत परियोजनाएं स्थापित करने के लिए विभिन्न कंपनियों को आमंत्रित किया था। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हाइड्रो पावर कंपनियों के बीच हुए समझौते के तहत कुल विद्युत उत्पादन का 12 प्रतिशत उत्तराखंड को निशुल्क दिया जाना है जबकि शेष बिजली उत्तर प्रदेश को आपूर्ति की जानी थी।

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