नयी दिल्ली , मार्च 16 -- जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने सोमवार को संसद में स्वीकार किया कि घर-घर नल से पेयजल पहुंचाने के लिए शुरू किये गये जल जीवन मिशन के तहत गूगल से सर्वेक्षण करने की शिकायतें आयी हैं और ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की जायेगी।

राज्यसभा में एक पूरक प्रश्न के उत्तर में श्री पाटिल ने बताया कि मिशन के तहत योजना निर्माण, स्वीकृति, क्रियान्वयन, संचालन और रखरखाव राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने गूगल से सर्वेक्षण किया है, ऐसी शिकायत आयी है। यदि ऐसा किया गया होगा तो उन पर कार्रवाई की जायेगी। सरकार ने 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के सभी डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) की जांच शुरू की है।

मंत्री ने कहा कि काम में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुजलाम् भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है जिसके माध्यम से ग्रामीण जलापूर्ति से संबंधित परिसंपत्तियों की मैपिंग,जिओ टैंगिंग और निगरानी की जाती है। हर गांव को सुजल गांव आईडी दी गयी है। इसके कारण यदि किसी ने गलती भी की होगी तो यहां पता चल जायेगी और उसकी बाद गलती को सुधार कर योजना पूरी की जायेगी।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत वित्त वर्ष 2020-21 से अब तक 8.53 करोड़ घरों को नल का जल के लिए कनेक्शन दिये गये हैं। यह ग्रामीण घरों की संख्या का 44 प्रतिशत है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त आंकड़ों के हवाले से श्री पाटिल ने बताया कि मीडिया और दूसरे माध्यमों से 18,790 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनके आधार पर 635 अधिकारियों, 1020 ठेकेदारों और 155 स्वतंत्र जांच एजेंसियों पर कार्रवाई की गयी है। सबसे ज्यादा 16,178 शिकायत उत्तर प्रदेश से मिली है। इसमें इसमें 196 विभागीय अधिकारियों, 120 ठेकेदारों और 145 जांच एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। शिकायतों के मामले में असम (1,226) दूसरे और छत्तीसगढ़ (329) चौथे स्थान पर है।

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