बैतूल , मई 06 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत ग्रामीण महिलाओं को जल गुणवत्ता जांच का प्रशिक्षण दिया गया। इस पहल का उद्देश्य जल संरक्षण और शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करना है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार विकासखंड चिचोली में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भाग लिया। कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम में कार्यपालन यंत्री के मार्गदर्शन में विकासखंड समन्वयक वैशाली आर्य ने फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) के माध्यम से पानी की गुणवत्ता जांचने की व्यावहारिक जानकारी दी।

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को गांव स्तर पर पेयजल के नमूने लेने, उनकी जांच करने और परिणामों को समझने की प्रक्रिया विस्तार से बताई गई। साथ ही जल संरक्षण और जल संवर्धन के महत्व पर भी जोर दिया गया।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि महिलाएं ग्राम पंचायत के साथ समन्वय स्थापित कर नलजल योजनाओं को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। जलकर वसूली की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई, ताकि बिजली बिल, पाइपलाइन मरम्मत और रखरखाव जैसे खर्चों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो सकें।

जनपद पंचायत की सीईओ प्रतिभा जैन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की सहायक यंत्री वंदना उपराले के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को जल प्रबंधन में सक्रिय भागीदारी के लिए सशक्त बनाना है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्धता और जल संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

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