भिण्ड , सितंबर 09 -- मध्यप्रदेश के भिण्ड शहर की जलावर्धन योजना का काम एक बार फिर अधर में लटक गया है। शहर में पाइपलाइन बिछाने और घर-घर पानी पहुंचाने का काम कर रही टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने जलापूर्ति शुरू किए बिना ही परियोजना का काम सरेंडर करने की बात कही है। कंपनी पर स्थानीय वेंडरों का करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का भुगतान रोकने का आरोप भी है।

वेंडरों के अनुसार बुधवार को कंपनी के रीजनल कंस्ट्रक्शन मैनेजर (आरसीएम) विवेक चौहान भिण्ड पहुंचे थे। बकाया भुगतान को लेकर वेंडरों ने उनसे चर्चा की। आरोप है कि चौहान ने वेंडरों से सिटी कोतवाली चलकर थाना प्रभारी के सामने बातचीत करने को कहा। सभी लोग कोतवाली पहुंचे, लेकिन चौहान यह कहकर अंदर चले गए कि पहले पुलिस अधिकारियों को आवेदन दिया जाए। आरोप है कि इसके बाद वह पीछे के रास्ते से निकल गए। काफी देर इंतजार के बाद वेंडरों को उनके चले जाने की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने सीएसपी को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की।

वेंडर शैलेंद्र सिंह भदौरिया ने आरोप लगाया कि कंपनी ने स्थानीय लोगों से पेटी कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से काम कराया, लेकिन भुगतान का समय आने पर अधिकारी जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं। वेंडरों का कहना है कि उनका करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये बकाया है।

नगर पालिका के सीएमओ वीरेंद्र चक्रवर्ती ने बताया कि जलावर्धन योजना का टेंडर और भुगतान मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी (एमपीयूडीसी) द्वारा किया गया है। नगर पालिका की भुगतान प्रक्रिया में प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। उन्होंने बताया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार शहर में बिछाई गई पाइपलाइन अभी तक चालू नहीं हुई है और बड़ी संख्या में नल कनेक्शन भी अधूरे हैं।

सीएमओ के अनुसार जब कंपनी के अधिकारियों से परियोजना का काम पूरा करने और स्थानीय वेंडरों का भुगतान करने को कहा गया तो मुंबई स्थित कंपनी के मुख्यालय से बताया गया कि कंपनी भिण्ड में परियोजना सरेंडर कर आगे काम नहीं करेगी। कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने की संभावना से अवगत कराने के बावजूद उसके अधिकारियों ने परियोजना छोड़ने की बात कही।

वेंडरों को कंपनी द्वारा भिण्ड स्थित अपना कार्यालय खाली किए जाने की जानकारी मिलने पर वे वहां पहुंच गए। कंपनी के कर्मचारियों को बातचीत के लिए सर्किट हाउस ले जाया गया, जहां विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह और सीएमओ वीरेंद्र चक्रवर्ती ने उनसे परियोजना की स्थिति की जानकारी ली। कंपनी के कर्मचारियों ने बताया कि भिण्ड में परियोजना का काम सरेंडर कर दिया गया है।

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