दरभंगा , जून 05 -- िहार के जाने-माने पर्यावरणविद् प्रो. विद्यानाथ झा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, वनों की कटाई और जैव विविधता का क्षरण आज विश्व के सामने सबसे गंभीर चुनौतियां हैं, जिसका प्रभाव केवल वर्तमान पीढ़ी ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर भी पड़ेगा।विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को डाक प्रशिक्षण केंद्र, दरभंगा एवं डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में "समकालीन पर्यावरणीय समस्याएं और समाधान" विषय पर आयोजित संगोष्ठी में प्रो. झा ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से कहा कि "पर्यावरण की समृद्धि ही संसार की समृद्धि है।" उन्होंने पर्यावरण शिक्षा को विद्यालय से लेकर उच्च शिक्षा तक पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि समाज और विशेषकर युवाओं को पर्यावरणीय चुनौतियों एवं उनके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना समय की मांग है। उन्होंने वायुमंडल को प्रदूषित करने वाले पदार्थों के उपयोग को कम करने तथा पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत में पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान सामूहिक प्रयास, जन-जागरूकता और सतत विकास के सिद्धांतों को अपनाकर किया जा सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डाक प्रशिक्षण केंद्र, दरभंगा के उपनिदेशक रामनिवास कुमार ने कहा कि वायु एवं जल प्रदूषण, कचरा प्रबंधन, भूजल स्तर में गिरावट, जैव विविधता का नुकसान और मिट्टी का क्षरण आज प्रमुख पर्यावरणीय समस्याएं बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या और संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से पर्यावरण पर गंभीर संकट उत्पन्न हो रहा है। केवल सरकार पर निर्भर रहने के बजाय प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि गंगा सहित सभी नदियों का संरक्षण मानव अस्तित्व के लिए अनिवार्य है।

सहायक निदेशक (प्रशासन) विमल कुमार झा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण के लिए 'थ्री आर' (कम करें, पुनः उपयोग करें, पुनर्चक्रण करें) के सिद्धांत को अपनाने पर बल देते हुए अपशिष्ट पदार्थों को कम करने और वस्तुओं के पुनः उपयोग की अपील की।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अतिथियों एवं डाक प्रशिक्षुओं ने डाक प्रशिक्षण केंद्र परिसर में पौधारोपण भी किया।

कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का संचालन एवं अतिथियों का स्वागत अनुदेशक आशीष कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने किया।

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