जौनपुर , जून 05 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री कृपा शंकर सिंह ने शुक्रवार को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कहा कि जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, सनातन व सभ्यता की आधारशिला हैं।

उन्होंने बढ़ते तापमान, घटते भूजल स्रोत, वायु प्रदूषण व जैव विविधता क्षरण पर चिंता जताते हुए जल संरक्षण, जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा प्राकृतिक जल स्रोतों व आर्द्रभूमियों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 54वें जन्मदिवस एवं विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सामाजिक संस्था परिश्रम द्वारा एक भव्य एवं ऐतिहासिक जनसेवा कार्यक्रम का आयोजन टीडी इण्टर कालेज में किया गया। संस्था के अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह एवं सचिव एडवोकेट अखिलेश चौबे के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में 54 दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल तथा 54 छात्राओं को साइकिल वितरित की गई। साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अतिथियों ने एक पेड़ मा के नाम लगाकर पौधरोपण किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

इसके पश्चात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में 11 किलो के मावा के केक का काटकर उत्साहपूर्वक जन्मोत्सव मनाया गया। उपस्थित लोगों ने मुख्यमंत्री के स्वस्थ, दीर्घायु एवं यशस्वी जीवन की कामना की। श्री सिंह ने नदियों की स्वच्छता को पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया और भारतीय संस्कृति में नदियों व वनों को मां व देवता रूप में पूजने का महत्व रेखांकित किया। संस्था के अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह ने कहा कि संस्था का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है और उनके जन्मदिवस पर जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित कर संस्था ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रयास किया है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद डॉ के.पी. सिंह ने कहा कि सामाजिक संस्था परिश्रम द्वारा किया जा रहा यह कार्य समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिवस को जनसेवा और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना एक सराहनीय पहल है। इससे समाज में सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता का संदेश जाता है।

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