नयी दिल्ली , मार्च 20 -- जर्मनी में एडमिशन के लिए सलाह सेवा देने वाली कंसल्टेंसी 'यस जर्मनी' ने शुक्रवार को भारतीय छात्रों के लिए यहां एक शिक्षा मेले का आयोजन किया जिसमें छात्रों को वहां अध्ययन के अवसर, उसके लिए जरूर अर्हताओं और अन्य संबंधित जरूरतों के बारे में जानकारी दी गयी।
'यस जर्मनी' की मुख्य कार्यकारी अधिकारी लतिका चौधरी ने बताया कि जर्मनी में साल 2023 में भारतीय छात्रों की संख्या 45 हजार थी। वहां की सरकार ने कहा है वह इस साल 90 हजार भारतीय छात्रों को वीजा देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, "ऐसे समय में जब कई देशों में भारतीयों के प्रति दुर्व्यवहार की शिकायतें आ रही हैं जर्मनी पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद है।"इस मेले में जर्मनी के कई विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि और प्राध्यापक भी शामिल हुए। उन्होंने छात्रों के लिए उपलब्ध पाठ्यक्रमों और दाखिले की प्रक्रियाओं के बारे में बताया।
श्रीमती चौधरी ने कहा कि पहले छात्रों की रुचि मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ज्यादा थी, लेकिन अब एआई के पाठ्यक्रमों की मांग बढ़ रही है। यस जर्मनी दाखिले से पहले की तैयारी से लेकर जर्मनी में ठहरने की व्यवस्था आदि में भी मदद करती है। दाखिले से पहले छात्रों को जर्मन भाषा सीखने और वहां की संस्कृति के बारे में जानकारी दी जाती है। वीजा और बैंक से ऋण लेने में भी मदद की जाती है।
उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी का जर्मनी के लगभग सभी बड़ी निजी और सार्वजनिक संस्थानों के साथ सहयोग है, लेकिन यदि कोई छात्र उनके अलावा किसी अन्य कॉलेज में दाखिले में मदद चाहते हैं तो वह भी मुहैया करायी जाती है।
खास बात यह है कि जर्मनी में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई काफी सस्ती है। सार्वजनिक संस्थान न के बराबर फीस लेते हैं। निजी संस्थानों का खर्च पांच लाख से 50 लाख रुपये के बीच है।
जर्मनी में पढ़ रहे एक छात्र अनिकेत ने बताया कि ग्रेटर नोएडा के नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से बीटेक किया था। इसके बाद उन्हें एक जर्मनी के फिलिप्स यूनिवर्सिटी में डाटा साइंस में स्नातकोत्तर में दाखिला मिला था। बाद में उन्होंने ब्रेंडनबर्ग यूनिवर्सिटी में एआई में दाखिला लिया जो बीएड में उनका विषय रहा था।
उन्होंने बताया कि वीजा आदि का कुल खर्च डेढ़ लाख से भी कम पड़ा। हर सेमेस्टर में 300 यूरो (करीब 32,400 रुपये) देना पड़ रहा है जिसे सेमेस्टर कंट्रीब्यूशन कहा जाता है। सार्वजनिक संस्थानों में कोई ट्यूशन फीस नहीं होती। वहां कोई खास सांस्कृतिक बदलाव महसूस नहीं हुआ, लेकिन खाना वह खुद बना रहे हैं। होस्टल में वहां मेस नहीं होता है। वह दो और भारतीयों, एक ईरानी और एक बांग्लादेशी छात्रों के साथ रहते हैं।
श्रीमती चौधरी ने बताया कि जर्मनी में छात्र पार्टटाइम जॉब करके डेढ़ से दो लाख रुपये तक कमा सकते हैं और अपनी पढ़ाई के पूरे खर्च की भरपाई कर सकते हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित