मुंबई , सितंबर 17 -- मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ बीड जिले के पाटोदा में हुई बातचीत के बाद गुरुवार को करीब 20 दिन से जारी अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया।

श्री जरांगे ने महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, मंत्री दादा भुसे, विधायक प्रसाद लाड, विधायक सुरेश धस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ गुरुवार सुबह हुई बातचीत के बाद आंदोलन स्थगित करने पर सहमति जतायी।

बातचीत के बाद श्री जरांगे ने मराठा आरक्षण से जुड़ी अपनी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई के लिए सरकार को 90 दिन का समय दिया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन को केवल स्थगित किया गया है, स्थायी रूप से समाप्त नहीं किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार तीन महीने की समय सीमा के भीतर ठोस कार्रवाई करने में विफल रही तो वह फिर से आंदोलन शुरू करेंगे और समर्थकों को मुंबई की ओर ले जाएंगे।

बातचीत सुबह करीब 5.30 बजे शुरू हुई। सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने श्री जरांगे से बिगड़ती सेहत को देखते हुए अनशन समाप्त करने का आग्रह किया और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी प्रमुख मांगों को निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा सकता है।

श्री जरांगे अपने आंदोलन के सिलसिले में अंतरवाली सराटी से मुंबई की ओर जा रहे थे, लेकिन आंदोलन के दौरान उनकी तबीयत कथित तौर पर खराब हो गयी थी। सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने जब उनसे मुलाकात की, उस समय वह पाटोदा में ठहरे हुए थे। बैठक में ऐतिहासिक गजटियर रिकॉर्ड लागू करने और मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने का मुद्दा प्रमुखता से उठा।

श्री जरांगे हैदराबाद और सतारा गजट सहित सभी ऐतिहासिक रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि कुनबी प्रमाणपत्र के लिए मराठा आवेदकों की पात्रता तय की जा सके। इससे पात्र लाभार्थियों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत मिलने वाले लाभ प्राप्त हो सकेंगे।

बैठक में मराठा-कुनबी रिकॉर्ड से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा हुई। श्री जरांगे ने कथित तौर पर मौजूद 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में उनके इस्तेमाल को लेकर सरकार से स्पष्टता और लिखित आश्वासन की मांग की।

बातचीत के बाद उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकार ने संबंधित गजट रिकॉर्ड को लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया अपनाने के प्रति सकारात्मक रुख का संकेत दिया। चर्चा में मराठा-कुनबी दस्तावेजों से संबंधित प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।

बातचीत का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि हाल के दिनों में श्री जरांगे के मुंबई की ओर प्रस्तावित मार्च और आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर बढ़ा तनाव अब कम हो गया है।

श्री विखे पाटिल के नेतृत्व में सरकार का प्रतिनिधिमंडल श्री जरांगे से सीधे बातचीत करने और खासकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें अनशन वापस लेने के लिए मनाने के उद्देश्य से पाटोदा पहुंचा था।

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