नयी दिल्ली , जून 13 -- दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने प्रधानमंत्री कार्यालय के पास स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड से बेदखली के मामले में सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
अवकाशकालीन पीठ के न्यायाधीश धीरेंद्र राणा सरकार के बेदखली के आदेश के खिलाफ इंडियन पोलो एसोसिएशन की याचिका पर शनिवार को सुनवाई की।
राजधानी के रेस कोर्स इलाके में प्रधानमंत्री कार्यालय के पास स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड को केंद्र सरकार ने अपने कब्ज़े में ले लिया है। सरकार ने इसके द्वार पर एक नोटिस चस्पा दिया है, जिसमें इसे सरकारी संपत्ति घोषित किया गया है। सरकार ने नोटिस में किसी भी अनधिकृत कब्ज़े या अतिक्रमण के खिलाफ चेतावनी दी है।
इंडियन पोलो एसोसिएशन ने पब्लिक प्रीमिसेस (अनधिकृत कब्ज़ा करने वालों को बेदखल करना) कानून , 1971 की धारा 9(3) के तहत याचिका दाखिल की थी, जिसमें 20 मई, 2026 के बेदखली आदेश पर रोक लगाने की मांग की गयी थी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील ने अपील और रोक लगाने की अर्ज़ी दोनों पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। अपीलकर्ता ने सुनवाई टालने का विरोध किया और अनुरोध किया कि अगली सुनवाई तक प्रतिवादी को बेदखली आदेश को लागू करने से रोका जाए, क्योंकि ऐसा न करने पर अपील बेअसर हो जाएगी। दलीलें सुनने और रिकॉर्ड की जांच करने के बाद अदालत ने पाया कि अपील तीन को दायर की गयी थी और पहले कोई अंतरिम रोक नहीं दी गयी थी। अदालत ने यह भी देखा कि इंडियन पोलो एसोसिएशन ने रिट याचिका (सिविल) नंबर 8112/2026 के ज़रिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था, जहाँ इसी तरह की अंतरिम राहत की मांग को ठुकरा दिया गया था। उच्च न्यायालय ने आठ जून को याचिका का निपटारा करते हुए निर्देश दिया था कि रोक लगाने की अर्ज़ी पर पटियाला हाउस कोर्ट के ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा निर्णय लिया जाए, और यह भी कहा था कि 12 जून तक बेदखली आदेश को तुरंत लागू करने की कोई संभावना नहीं है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित