जयपुर , जुलाई 30 -- राजस्थान में राज ममता कार्यक्रम के तहत प्रदेश के जयपुर, जोधपुर मेडिकल कॉलेज और एम्स जोधपुर में वेब आधारित टूल किट ग्लोबल मेंटल हेल्थ असेसमेंट टूल (जीएमएचएटी) लागू किया जाएगा।
चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा सभी के लिए मानसिक स्वास्थ्य के तहत अवसाद चिंता, आत्महत्या आदि की रोकथाम के लिए राज ममता कार्यक्रम चलाए जाने की की गयी बजट घोषणा की गयी थी, इसी कड़ी में प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ एवं साक्ष्य-आधारित बनाने की दिशा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की गयी है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि यह वेब-आधारित डिजिटल एप मरीजों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर एवं वैज्ञानिक पहचान सुनिश्चित करेगा, जिससे उपचार में तेजी आएगी और विशेषज्ञ सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान होगी।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ तथा यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के संयुक्त सहयोग से उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई।
श्रीमती राठौड़ ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जीएमएचएटी एक वेब-आधारित डिजिटल असेसमेंट टूल है, जिसके माध्यम से मरीज का निर्धारित प्रश्नों के आधार पर साक्षात्कार किया जाएगा। साक्षात्कार पूरा होते ही सिस्टम स्वतः रिपोर्ट तैयार करेगा, जिससे बीमारी के संभावित लक्षणों का आकलन कर उचित उपचार की दिशा तय की जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि आवश्यकता होने पर टेलीमेडिसिन के माध्यम से मरीज का तत्काल मानसिक रोग विशेषज्ञ से परामर्श कराया जाएगा, जिससे दूर-दराज़ एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी बिना अनावश्यक यात्रा किए विशेषज्ञ चिकित्सा सलाह और उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
श्रीमती राठौड़ ने कहा कि इस डिजिटल प्रणाली से प्रदेश में मानसिक रोगों का डेटा-आधारित आकलन संभव होगा। इससे विभिन्न क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की स्थिति, गंभीरता एवं प्रवृत्तियों का विश्लेषण कर आवश्यकता के अनुरूप सेवाओं की बेहतर योजना बनायी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि पहले इस प्रकार का मानकीकृत टूल उपलब्ध नहीं होने के कारण कई बार मानसिक रोगों के लक्षणों की पहचान में समय लगता था, जिससे उपचार भी प्रभावित होता था। यह टूल किट इस चुनौती का प्रभावी समाधान बनेगा।
उन्होंने बताया कि जयपुर, जोधपुर मेडिकल कॉलेज और जोधपुर एम्स के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा, जिससे मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुदृढ़, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण बन सकेंगी।
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