जम्मू , अप्रैल 26 -- जम्मू- कश्मीर में दो चरणों में होने वाले जनगणना अभियानों को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इन तैयारियों में प्रशासनिक सीमाओं को अंतिम रूप देना, डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करना और फील्ड कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना शामिल है।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय में मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी (सीपीसीओ) और जनगणना अभियान निदेशक (डीसीओ) अमित शर्मा ने जनगणना डेटा के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शासन की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि नीतियां बनाने, कल्याणकारी योजनाओं को लक्षित तरीके से लोगों तक पहुंचाने और स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और सामाजिक विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों में संसाधनों का इष्टतम आवंटन करने में यह डेटा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
श्री शर्मा को जम्मू - कश्मीर तथा लद्दाख के जनगणना अभियानों को संभालने का कार्य सौंपा गया है। उन्होंने जम्मू में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अपने मुख्य भाषण के दौरान जनगणना 2027 के रोडमैप और महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इसे एक परिवर्तनकारी राष्ट्रीय अभ्यास बताया, जो देश में डेटा-आधारित शासन को एक नयी परिभाषा देगा।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जनगणना 2027 भारत के विकास पथ को आकार देने और साक्ष्य-आधारित शासन को मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
रोटरी क्लब जम्मू सिटी द्वारा फोर्टिस अस्पताल, गुरुग्राम के सहयोग से आयोजित 'हेल्थ टॉक' में मुख्य अतिथि के रूप में एक विशेष सभा को संबोधित करते हुए सीपीसीओ ने कहा कि जनगणना 2027 भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल और कागज-रहित जनगणना होगी। इसका उद्देश्य प्रभावी नीति नियोजन और शासन के लिए सटीक, वास्तविक समय का और विस्तृत डेटा तैयार करना है।
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