श्रीनगर , अक्टूबर 20 -- जम्मू-कश्मीर में मेडिकल इंटर्न ने मंगलवार को फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह 30 दिनों के भीतर उनका स्टाइपेंड (भत्ता) बढ़ाने के अपने लिखित वादे को पूरा करने में विफल रही है।

केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) भर के एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न ने पिछले महीने भी विरोध प्रदर्शन किया था। उनकी मांग थी कि उनके मासिक स्टाइपेंड को 12,300 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए।

इंटर्न ने बताया कि नौ सितंबर को उन्होंने अपना आंदोलन तब वापस ले लिया था, जब सरकार ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि स्टाइपेंड बढ़ाने की उनकी मांग एक महीने के भीतर पूरी कर दी जाएगी। उनका हालांकि आरोप है कि सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया, जिसके कारण उन्हें फिर से सड़कों पर उतरना पड़ा।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा भरोसा तोड़े जाने पर निराशा जताई। इसी विभाग के लिखित आश्वासन के बाद उन्होंने अपनी हड़ताल रोकी थी।

प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने कहा, "हमने जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दिए गए लिखित आश्वासन पर भरोसा किया था और सोचा था कि इसकी कोई अहमियत होगी। हमने मंत्री और अधिकारियों का सम्मान किया, लेकिन अब हम फिर से वहीं आ गए हैं, जहां से शुरू किया था, हमारा स्टाइपेंड अभी भी 12,300 रुपये ही है।"छात्रों ने बताया कि सोमवार को अधिकारियों से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल (जिसमें लिखित आश्वासन पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी और वित्त महानिदेशक शामिल थे) को दो और दिन इंतजार करने के लिए कहा गया।

उन्होंने बार-बार समय सीमा बढ़ाए जाने पर सवाल उठाया और कहा कि वे सरकार द्वारा वादा किए गए 30 दिनों के समय का पहले ही इंतजार कर चुके हैं।

इंटर्न ने आगामी 'दरबार मूव' (जिसके तहत सरकारी कार्यालय श्रीनगर से जम्मू स्थानांतरित हो जाते हैं) को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस स्थानांतरण के कारण अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों के छात्रों के लिए संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी मांगें रखना और भी मुश्किल हो सकता है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि लंबे समय से बनी अनिश्चितता ने मेडिकल समुदाय को निराश और अपमानित किया है। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जब उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया जा रहा है, तो मेडिकल छात्रों को कोई समर्थन क्यों नहीं मिल रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती है, तो यह आंदोलन एक बड़ी हड़ताल में बदल सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विरोध प्रदर्शन को फिर से शुरू करना, दिए गए आश्वासनों को पूरा न किए जाने के खिलाफ एक प्रतिक्रिया है।

इंटर्न अपने मासिक वजीफे (स्टाइपेंड) में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा वजीफा अस्पतालों में उनके काम के बोझ और जिम्मेदारियों के हिसाब से बहुत कम है।

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