श्रीनगर , मई 06 -- जम्मू-कश्मीर में अक्टूबर 2025 में हुए राज्यसभा चुनाव को लेकर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है।
विवाद तब बढ़ गया जब एनसी के मुख्य प्रवक्ता और विधायक तनवीर सादिक ने पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और उनकी पार्टी के तीन विधायकों को कुरान पर हाथ रखकर यह कहने की चुनौती दी कि उन्होंने चुनाव में भाजपा उम्मीदवार सतपाल शर्मा का समर्थन नहीं किया था।
सुश्री मुफ्ती ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एनसी राजनीतिक मुद्दों में धर्म को घसीटकर "नए निचले स्तर" पर पहुंच गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनसी कुरान की पवित्रता और धर्म की समझ नहीं रखती।
उन्होंने कहा कि वक्फ विधेयक, सिराज-उल-उलूम विवाद और उर्दू भाषा के मुद्दे पर एनसी की चुप्पी इसकी मिसाल है।
विवाद की जड़ 24 अक्टूबर 2025 को हुए राज्यसभा चुनाव हैं, जहां एनसी ने पर्याप्त संख्या होने के बावजूद चार में से केवल तीन सीटें जीतीं, जबकि चौथी सीट भाजपा के सत शर्मा ने जीत ली। एनसी उम्मीदवार इमरान नबी डार हार गए थे। सूचना के अधिकार (आरटीआई) से यह खुलासा होने के बाद विवाद और बढ़ गया कि पीडीपी ने चुनाव के लिए अधिकृत एजेंट नियुक्त नहीं किया था। एनसी ने आरोप लगाया कि पीडीपी ने भाजपा का समर्थन किया।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पीडीपी वही पार्टी है जिसने "भाजपा के कहने पर" राज्यसभा चुनाव में मदद की। उन्होंने कहा, "यह अब नहीं कहा जा रहा है बल्कि आरटीआई से साबित हो चुका है।"इस बीच, पीडीपी नेता वहीद पर्रा ने कहा कि एनसी असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पीडीपी ने बिना शर्त एनसी का समर्थन किया था और चौथी सीट को "दोषारोपण का खेल" न बनाने की सलाह दी थी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित