श्रीनगर , सितंबर 24 -- जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में आकस्मिक, मौसमी, अस्थायी, संविदा और जरूरत के आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण की नीति को अंतिम रूप देने के लिए फिलहाल कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की गई है।

सरकार ने कहा कि यह मामला सक्रिय विचाराधीन है और मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति इस मुद्दे की व्यापक समीक्षा कर रही है। समिति नियमितीकरण से जुड़े कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं की भी जांच कर रही है।

श्री अब्दुल्ला ने विधानसभा में विधायक मोहम्मद तारिगामी के सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। श्री तारिगामी ने ऐसे कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए गठित समिति की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी थी। सरकार के अनुसार, समिति का गठन मार्च 2025 में किया गया था और वह जम्मू-कश्मीर के विभिन्न विभागों में अलग-अलग समय पर नियुक्त किए गए कर्मचारियों के मामलों की जांच कर रही है।

समिति को इन कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े मानवीय, कानूनी और वित्तीय पहलुओं की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। सरकार ने कहा कि इन कर्मचारियों की अलग-अलग श्रेणियां हैं और उन्हें अलग-अलग समय पर अलग-अलग नियमों एवं शर्तों के तहत नियुक्त किया गया था।

सरकार ने कहा कि प्रस्तावित नीति लागू वैधानिक प्रावधानों, मौजूदा कानूनी स्थिति और निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के अनुरूप होनी होगी। इसके साथ ही नियमितीकरण के वित्तीय प्रभावों को भी ध्यान में रखना होगा।

श्री अब्दुल्ला ने कहा, "समिति सभी विभागों में कानूनी रूप से लागू किए जा सकने वाले और प्रशासनिक रूप से कार्यान्वित किए जा सकने वाले एक समान ढांचे के निर्माण के लिए व्यापक जांच कर रही है।"समिति की रिपोर्ट सौंपने और अंतिम नीति पर निर्णय की समय सीमा के बारे में सरकार ने कहा कि वह इस मामले के व्यवस्थित और स्थायी समाधान की आवश्यकता से अवगत है।

श्री अब्दुल्ला ने कहा, "यह मुद्दा सक्रिय विचाराधीन है और आवश्यक जांच तथा परामर्श जल्द से जल्द पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, इसमें शामिल विभिन्न श्रेणियों तथा किसी भी निर्णय के कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय प्रभावों को देखते हुए इस स्तर पर कोई निश्चित समयसीमा बताना उचित नहीं होगा।" उन्होंने कहा कि सरकार संबंधित सभी पहलुओं की जांच पूरी करने और संबंधित विभागों तथा प्राधिकरणों से आवश्यक जानकारी मिलने के बाद विचार-विमर्श के आधार पर निर्णय लेगी।

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