श्रीनगर , अगस्त 17 -- जम्मू-कश्मीर में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई में 9,417 वाहन और मशीनें जब्त की गई हैं। इस अवधि में 20.009 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया और 285 प्राथमिकी दर्ज की गई।
इन आंकड़ों ने प्रवर्तन कार्रवाई और आपराधिक मुकदमों के बीच साफ अंतर को लेकर चिंता पैदा कर दी है क्योंकि कई जिलों में जब्ती की सैकड़ों घटनाओं के बावजूद प्राथमिकी बहुत कम दर्ज की गईं।
कठुआ जिले में सबसे अधिक 1,019 जब्ती की घटनाएं दर्ज की गईं लेकिन जिले में सिर्फ एक प्राथमिकी दर्ज हुई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुपवाड़ा में 972 जब्ती और 48 प्राथमिकी दर्ज हुईं, जबकि बारामूला में 845 जब्ती और 41 प्राथमिकी दर्ज की गईं। सांबा में 800 जब्ती की घटनाएं हुईं, लेकिन कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
आंकड़ों से जिलों के बीच प्रवर्तन के तरीकों में काफी अंतर का पता चला। आपराधिक मामलों में जम्मू-कश्मीर में बडगाम सबसे ऊपर रहा, जहां अवैध खनन करने वालों के खिलाफ 671 जब्ती के बावजूद 62 प्राथमिकी दर्ज की गईं। इसके बाद कुपवाड़ा (48 प्राथमिकी), बारामूला (41), गांदरबल (30) और श्रीनगर (29) का स्थान रहा।
जुर्माना वसूली के मामले में भी कठुआ सूची में सबसे ऊपर रहा, जहां प्रशासन ने 3.308 करोड़ रुपये वसूले। इसके बाद जम्मू (2.248 करोड़ रुपये), पुलवामा (2.008 करोड़ रुपये), बारामूला (1.618 करोड़ रुपये) और कुपवाड़ा (1.499 करोड़ रुपये) का स्थान रहा। अन्य जिलों में अनंतनाग में 530 जब्ती की घटनाएं हुईं, जिससे 1.01 करोड़ रुपये की वसूली हुई, जबकि कुलगाम में 391 जब्ती और 0.949 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया।
जम्मू संभाग में जम्मू जिले में 679 जब्ती और 15 प्राथमिकी दर्ज की गईं और 2.248 करोड़ रुपये वसूले गए। रियासी में जब्ती के 356 मामले दर्ज किए गए, जबकि राजौरी और उधमपुर में क्रमशः 317 और 277 मामले सामने आए।
श्री एमवाई तारिगामी की अध्यक्षता में पर्यावरण समिति की हालिया बैठक में अवैध खनन से जुड़ी जब्ती और प्राथमिकी के आंकड़ों में अंतर की समीक्षा की गई। इस अंतर पर चिंता जताते हुए समिति के सदस्यों ने खनन विभाग से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा।
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