श्रीनगर , अप्रैल 27 -- जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने दक्षिण कश्मीर स्थित दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक गैरकानूनी संस्था घोषित कर दिया है।

कश्मीर के संभागीय आयुक्त द्वारा जारी आदेश में संस्थान के प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के साथ कथित संबंधों और राष्ट्रीय सुरक्षा के विरुद्ध गतिविधियों का हवाला दिया गया है। यह कार्रवाई शोपियां के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) द्वारा 24 मार्च, 2026 को सौंपी गई एक रिपोर्ट के बाद की गई है।

संभागीय आयुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार, रिकॉर्ड की जांच से पता चला है कि यह संस्थान भले ही एक धार्मिक शिक्षण संस्थान के रूप में काम कर रहा था, लेकिन यह गंभीर कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं से घिरा हुआ है। इसमें जमीन के संदिग्ध अधिग्रहण, सक्षम अधिकारियों के साथ अनिवार्य पंजीकरण की कमी और वैधानिक निगरानी से बचने के जानबूझकर किए गए प्रयास शामिल हैं।

आदेश में उन 'विश्वसनीय सूचनाओं' का भी उल्लेख किया गया है जो 2019 में भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी के साथ संस्थान के निरंतर और गुप्त संबंधों का संकेत देते हैं। आरोप है कि प्रतिबंधित संगठन से जुड़े व्यक्ति महत्वपूर्ण प्रशासनिक और शैक्षणिक पदों पर नियंत्रण रखते थे। इसके अलावा, संस्थान के वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता की कमी और धन के संदिग्ध प्रबंधन ने भी चिंताएं बढ़ाई हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट में कहा गया है कि संस्थान ने कट्टरपंथ को बढ़ावा देने का काम किया, जिसमें कई पूर्व छात्र उग्रवादी गतिविधियों और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ कार्यों में शामिल पाए गए। यह राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरनाक उद्देश्यों के लिए संस्थान के दुरुपयोग का संकेत देता है। यूएपीए की धारा 8(1) का प्रयोग करते हुए प्रशासन ने परिसर को सील करने और वित्तीय संपत्तियों को फ्रीज करने के निर्देश दिए हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित