श्रीनगर , जून 6 -- जम्मू-कश्मीर सरकार ने शनिवार को कहा कि उसने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की है।
केंद्र शासित प्रदेश की शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने कहा कि सरकार ने इस मामले को लगातार आगे बढ़ाया है और उच्चतम न्यायालय के फैसले से प्रभावित शिक्षकों के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सुश्री इटू ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा,"प्रतिबद्धता के अनुसार समीक्षा याचिका माननीय उच्चतम न्यायालय में दायर की जा चुकी है। सरकार ने इस मामले को लगातार आगे बढ़ाया है और हम शिक्षकों के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।"यह घटनाक्रम शीर्ष अदालत द्वारा मई के अंतिम सप्ताह में उसके 2025 के फैसले की समीक्षा की मांग वाली याचिकाओं को खारिज करने के बाद सामने आया है जिसमें शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी को अनिवार्य कर दिया गया था।
इससे पहले 30 मई को सुश्री इटू ने कहा था कि सरकार ने इस मुद्दे पर जिम्मेदारीपूर्वक एवं सक्रियता के साथ कार्रवाई की है और उच्चतम न्यायालय के समक्ष पुनर्विचार याचिका दायर करने की मंजूरी पहले ही दे चुकी है।
उन्होंने कहा था कि विधि, न्याय और संसदीय मामलों के विभाग ने 26 मई के एक पत्र के माध्यम से अपने स्थायी वकील को आवश्यक कानूनी कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया था।
इस मुद्दे ने जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सरकार पर आरोप लगाया है कि जब अन्य राज्यों ने प्रभावित शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए शीर्ष अदालत में पुनर्विचार याचिकाएं दायर कीं तब उमर सरकार चुप रही।
सुश्री महबूबा ने कहा था कि पहले समर्थन के आश्वासन दिए जाने के बावजूद, जम्मू-कश्मीर सरकार समय पर कार्रवाई करने में विफल रही, जिससे उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अनिश्चितता का सामना कर रहे शिक्षकों के बीच चिंताएं बढ़ गईं।
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