जम्मू , जुलाई 12 -- जम्मू-कश्मीर खेल परिषद ने रविवार को पैरा तीरंदाज राकेश कुमार के उन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि साल 2022 के खेल कोटा नियम के तहत सरकारी नौकरियों की सूची से उन्हें जानबूझकर बाहर रखा गया।

खेल परिषद ने साफ किया कि इस खिलाड़ी ने इन नौकरियों के लिए कभी आवेदन ही नहीं किया था, इसलिए उनके नाम पर विचार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

सोशल मीडिया पर पैरा-तीरंदाज राकेश कुमार का एक वीडियो सामने आने के बाद खेल परिषद के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि मीडिया में श्री कुमार के हवाले से जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। इन बयानों में आरोप लगाया गया था कि होनहार खिलाड़ियों की सरकारी नौकरी वाली भर्ती प्रक्रिया से उन्हें जानबूझकर और गलत तरीके से बाहर रखा गया।

प्रवक्ता ने कहा, "ये दावे सच्चाई से कोसों दूर हैं। जनता के भरोसे और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए इस मामले में सच सामने लाना बेहद जरूरी है।" उन्होंने बताया कि विभाग के सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, जब खेल कोटे के तहत नौकरियों के लिए आवेदन मांगे गए थे, तब श्री कुमार ने कोई आवेदन पत्र जमा ही नहीं किया था। जब उनका कोई आवेदन ही नहीं आया, तो जांच करने वाली समिति या चयन समिति के सामने उनके नाम पर विचार करने का कोई रास्ता ही नहीं था।

प्रवक्ता ने बताया कि यह पूरी भर्ती प्रक्रिया बिल्कुल साफ-सुथरी और नियमों के दायरे में पूरी की गई थी। समय पर मिले सभी आवेदनों की जांच के बाद, खेल विभाग ने 19 जुलाई 2024 को एक सामान्य योग्यता सूची जारी की थी। इस सूची को पूरे 15 दिनों के लिए जनता के सामने रखा गया था, ताकि अगर किसी को कोई शिकायत, आपत्ति या सुधार करवाना हो, तो वह अपनी बात कह सके।

विज्ञप्ति के अनुसार, इस शिकायत अवधि के दौरान श्री कुमार ने न तो कोई आपत्ति दर्ज करायी और न ही लिस्ट में अपना नाम न होने पर कोई शिकायत की, जबकि विभाग ने सभी खिलाड़ियों को अपनी बात रखने का पूरा और बराबर मौका दिया था।

बयान के अनुसार, जब यह भर्ती प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी और 11 फरवरी 2026 को शुरुआती चयन सूची जारी हो गई, उसके बाद ही श्री कुमार ने एक पत्र लिखकर पिछले दरवाजे से खुद को इस भर्ती में शामिल करने की मांग की थी।

ऐसे में यह आरोप लगाना कि श्री कुमार को नौकरी की सूची से 'बाहर' कर दिया गया, सरकारी रिकॉर्ड के हिसाब से बिल्कुल गलत है। सच यह है कि उन्होंने खुद ही इस भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया था, न कि उन्हें बाहर निकाला गया था।

विभाग ने चेतावनी दी, "अगर कोई भी व्यक्ति सरकारी काम को लेकर जानबूझकर झूठी या गुमराह करने वाली जानकारी फैलाएगा, जिससे जनता के बीच भ्रम पैदा हो या भर्ती प्रक्रिया में बाधा आए, तो उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।"खेल परिषद ने सभी खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों से अपील की है कि वे इस तरह के सार्वजनिक मामलों पर कोई भी राय बनाने से पहले केवल सरकारी बयानों और पक्के रिकॉर्ड पर ही भरोसा करें।

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