भोपाल , अक्टूबर 15 -- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में जबलपुर-भोपाल-इंदौर औद्योगिक कॉरिडोर के समेकित विकास के लिए विशेष प्रयोजन कंपनी के गठन को मंजूरी दी गई। इसके माध्यम से इंदौर, भोपाल, जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, सीहोर और देवास जिलों में औद्योगिक एवं आर्थिक हब विकसित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में निवेश बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
प्रस्तावित कंपनी का नाम 'जबलपुर-भोपाल-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड' होगा। यह मध्यप्रदेश शासन के पूर्ण स्वामित्व और नियंत्रण में काम करेगी। कंपनी को प्रारंभिक चुकता पूंजी के रूप में 100 करोड़ रुपये दिए जाएंगे, जबकि 20 करोड़ रुपये का ब्याजमुक्त ऋण कार्यशील पूंजी के लिए उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। कंपनी औद्योगिक क्षेत्रों की योजना बनाने, आंतरिक अधोसंरचना विकसित करने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित करेगी। मुख्य सड़कों का निर्माण संबंधित सड़क निर्माण एजेंसियों द्वारा किया जाएगा।
परियोजना के पहले चरण में सात जिलों में लगभग 10 हजार एकड़ क्षेत्र में तीन से पांच प्राथमिक औद्योगिक हब विकसित करने की योजना है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निजी और संस्थागत निवेश आकर्षित होने की संभावना है। इससे एक लाख प्रत्यक्ष और दो लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। आगामी तीन वर्षों में कॉरिडोर के विकास के साथ कुल निवेश तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने और छह लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
योजना में कृषि आधारित उद्योगों को भी प्राथमिकता दी गई है। नरसिंहपुर और रायसेन में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, फूड पार्क, भंडारण और शीतगृह सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इससे किसानों की उपज का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन बढ़ाने में मदद मिलेगी। जबलपुर क्षेत्र में इंजीनियरिंग, विनिर्माण, रक्षा क्षेत्र की सहायक इकाइयों और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के विकास पर ध्यान दिया जाएगा।
भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में सूचना प्रौद्योगिकी, आईटी आधारित सेवाओं, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और अनुसंधान एवं विकास से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना है। सीहोर और देवास में खाद्य प्रसंस्करण, विनिर्माण, भंडारण और लॉजिस्टिक्स हब विकसित किए जाएंगे, जबकि इंदौर क्षेत्र में उन्नत विनिर्माण और आधुनिक आईटी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा।
औद्योगिक हबों में निवेशकों को विकसित भूमि, आंतरिक सड़कें, बिजली, औद्योगिक जल, अपशिष्ट प्रबंधन और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। श्रमिकों और कर्मचारियों के लिए आवास, अस्पताल, विद्यालय, कौशल विकास केंद्र, खेल परिसर और हरित क्षेत्र विकसित करने का भी प्रस्ताव है। परियोजनाओं के वित्तपोषण और क्रियान्वयन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी, संस्थागत वित्त, भूमि मुद्रीकरण और लीज प्रीमियम जैसे विकल्पों का उपयोग किया जा सकेगा।
कंपनी के संचालन के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गवर्निंग काउंसिल गठित की जाएगी। कार्यकारी निकाय और पेशेवर टीमों के माध्यम से परियोजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भूमि का चयन पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान पोर्टल के माध्यम से कनेक्टिविटी, जल उपलब्धता, बिजली, पर्यावरणीय प्रभाव और बाजार की मांग का आकलन कर किए जाने की योजना है।
मंत्रि-परिषद ने औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को परियोजना के क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आवश्यक अधिसूचनाएं और शासनादेश जारी करने के लिए अधिकृत किया है। सरकार के अनुसार, यह कॉरिडोर प्रदेश में संतुलित औद्योगिकीकरण, निवेश विस्तार और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी।
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