जयपुर , मई 23 -- राजस्थान के ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने बताया है कि वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026 का प्रदेशव्यापी शुभारंभ 25 मई को गंगा दशमी के अवसर पर किया जायेगा जो जल संग्रहण और संरक्षण के लिए जन जागृति से जन आंदोलन बनेगा।
डॉ. मीणा की अध्यक्षता में शनिवार को शासन सचिवालय में तैयारियों को लेकर उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसमें कर्मभूमि से मातृभूमि और जल संचय जन भागीदारी अभियान की प्रगति पर भी विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में विद्यालय शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री संजय शर्मा और पंचायती राज व ग्रामीण विकास राज्य मंत्री ओटा राम देवासी शामिल हुए।
डॉ मीणा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में जल संरक्षण और स्वच्छता का अभियान जल आंदोलन बनेगा। सामूहिक प्रयासों के लिए अभियान में सभी दलों, विचारकों, सांसदों, विधायकों, जनप्रतिनिधियों, भामाशाहों, स्वयंसेवी संस्थाओं, उद्योगपतियों, धार्मिक संस्थाओं और प्रत्येक व्यक्ति को जोडा जाए। सभी विभाग समन्वय से कार्यों को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि सभी जिला प्रभारी सचिव अपने जिलों में रहेंगे।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के वितरीत प्रभावों से बचाव के लिए अभियान और हरियालो राजस्थान में अधिकाधिक पौधारोपण कराएं। यह अभियान पर्यावरण प्रदूषण को दूर करने में भी सहायक सिद्ध होगा। इसमें राजीविका से जुड़ी महिलाओं को भी जोड़े। हर गांव में कलश यात्राएं निकालकर पीपल पूजन, प्रभात फेरी जैसे कार्यक्रम होने चाहिए, उसी से भावनात्मक जुड़ाव होगा और जनजागरूकता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि वंदे गंगा अभियान में दौरान किसानों को ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम) की गतिविधियों की जानकारी भी दी जाए। इसमें देश-विदेश में उन्नत कृषि, जल प्रबंधन, फसल विविधीकरण जैसे नवाचारों को बढ़ावा देने आदि के बारे में बताएं।
उन्होंने कहा कि गत वर्ष अभियान में 1.32 करोड़ महिलाओं सहित 2.53 करोड़ नागरिकों की सहभागिता रही। इस बार और अधिक लोगों को जोड़ें। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण से भू-जल रिचार्ज होता है। वनस्पतियां पनपती हैं। वनस्पतियों से प्राणवायु मिलती है और पर्यावरण सुरक्षित रहता है। इससे ही जीवन का संतुलन बना रहता है।
बैठक में श्री दिलावर ने कहा कि नागरिकों को जल संरक्षण के फायदों के बारे में भी जानकारी देनी चाहिए, इसी से ही अभियान गति पकड़ेगा। श्री रावत ने कहा कि अभियान में युवाओं खासकर विद्यार्थियों को अधिकाधिक जोडें। परम्परागत जल स्रोतों की सफाई कराएं, जिससे मानसून में लबालब हो। वाटर हार्वेस्टिंग के लिए भी लोगों को जागरूक करें। घरों में वाटर स्ट्रक्चर बनाने वालों को सम्मानित करें, ताकि अन्य लोग भी प्रेरित हो सकें।
श्री संजय शर्मा ने कहा कि इस महत्वपूर्ण अभियान को एकजुट होकर सफल बनाएं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2024 में सात करोड़ से अधिक और वर्ष 2025 में 11.55 करोड़ से अधिक पौधारोपण किया गया है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में 5 वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य है। इस वर्ष विभिन्न जिलों में चंदन के पौधे भी लगाए जाएंगे।
श्री देवासी ने कहा कि यह अभियान भविष्य के लिए जल-जंगल संरक्षण में आमजन का एक अतिमहत्वपूर्ण अभियान है। बारिश से पहले ही सभी जल स्त्रोतों की सफाई की जाए।
बैठक में जल संचय जल भागीदारी अभियान के कार्यों पर भी चर्चा हुई। जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार ने अभियान में राज्य की प्रगति से अवगत कराते हुए बताया कि जल भंडारण क्षमता बढ़ाने एवं भू-जल पुनर्भरण के लिए विभिन्न जल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। राज्य में कुल 2 लाख 67 हजार 837 कार्यों में से 2 लाख 33 हजार 854 कार्य पूर्ण और 33 हजार 983 प्रगति पर हैं।
बैठक में भू-जल विभाग के प्रमुख शासन सचिव हेमंत कुमार गेरा ने कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान के बारे जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में गिरते भू-जल की रोकथाम के लिए जन सहभागिता से व्यर्थ बहने वाले वर्षा जल की एक-एक बूंद का संचयन, संग्रहण व भू-जल पुनर्भरण करना लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में 86.78 करोड़ रुपए की जनभागीदारी से पांच हजार के लक्ष्य पर 17093 और वर्ष 2026-27 (अब तक) में पांच हजार के लक्ष्य पर 2064 जल संरचनाएं बनाई गई हैं।
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