(सिरशेंदु पंत से)कोलकाता , अप्रैल 21 -- पूर्व सांसद मोहम्मद सलीम ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार का राष्ट्रीय विकल्प केवल किसानों, मजदूरों, मध्यम वर्ग, युवाओं और छात्रों के आंदोलनों से ही उभर सकता है।
उन्होंने कहा, "यह काम वातानुकूलित कमरों में बैठकर नहीं हो सकता, इसके लिए सड़कों पर उतरना होगा।"मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पोलित ब्यूरो सदस्य श्री सलीम ने कहा कि गैर-वाम धर्मनिरपेक्ष विपक्षी दलों की कमजोरी और जन मुद्दों को उठाने में उनकी अनिच्छा, मौजूदा सरकार के खिलाफ संघर्ष में बड़ी बाधा है। उन्होंने इसे "नव-फासीवादी प्रवृत्तियों" के खिलाफ लड़ाई बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा केंद्र सरकार "कामगार वर्ग पर हमले कर रही है और लोकतांत्रिक दायरे को सीमित कर रही है।" विदेश नीति पर भी उन्होंने सरकार को 'विफल' करार दिया।
श्री सलीम ने कहा कि विपक्षी दल जन मुद्दों को लेकर निरंतरता नहीं दिखा पा रहे हैं। उन्होंने कहा, "कभी-कभी उम्मीद बनती है, लेकिन उसे बनाये रखना चुनौती है। यह एक बार का मामला नहीं है।"उन्होंने ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच हालिया संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिमी देशों में भी लाखों लोग सड़कों पर उतरे, लेकिन भारत में कुछ दल इस आशंका से खुलकर नहीं बोलते कि इससे राजनीति विभाजनकारी हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में वामपंथ की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा, "वाम आंदोलन ही लोगों के जीवन-यापन के मुद्दों को केंद्र में ला सकता है,"उन्होंने हालांकि स्वीकार किया कि वाम दल कमजोर हुए हैं।
श्री सलीम ने हाल के वाम आंदोलनों का उल्लेख करते हुए 13 अप्रैल की मजदूर हड़ताल, संयुक्त किसान आंदोलन और 'आक्रोश यात्रा' का जिक्र किया, जो रामलीला मैदान, दिल्ली में समाप्त हुई। उन्होंने कहा कि भले ही इन आंदोलनों को मुख्यधारा मीडिया में जगह नहीं मिलती, लेकिन ये उम्मीद की किरण दिखाते हैं।
उन्होंने व्यापक वाम-लोकतांत्रिक एकता की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि बढ़ती महंगाई, रुपये की गिरावट, ईंधन की कीमतों में वृद्धि और 'नफरत की राजनीति' के बीच लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एकजुट होना होगा।
पश्चिम बंगाल की राजनीति पर श्री सलीम ने कहा कि वाम मोर्चा के कमजोर होने का असर पूरे गठबंधन पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि किसी भी गठबंधन के लिए एक मजबूत धुरी जरूरी होती है और माकपा ने पहले यह भूमिका निभाई थी।
उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद उसने वाम दलों पर हमले किये और पूरे वाम पारिस्थितिकी तंत्र को कमजोर किया। उन्होंने दावा किया कि माकपा कार्यकर्ताओं पर एक लाख झूठे मुकदमे दर्ज किये गये, जो अदालत में टिक नहीं पाये।
वाम मोर्चा को बोझ मानने के सवाल पर श्री सलीम ने इसे खारिज करते हुए कहा कि गठबंधन को मजबूत करने के लिए सभी सहयोगियों को लचीला रुख अपनाना होगा।
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