पटना , जनवरी 31 -- भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने नीट छात्रा बलात्कार- हत्या मामले में बिहार सरकार की ओर से सीबीआई जांच की सिफारिश को जनसंघर्षों की जीत बताया है।
माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आइसा, एपवा और पीड़ित परिवार के आंदोलनों के दबाव में सरकार को सीबीआई जांच की सिफारिश करनी पड़ी, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि 3 फरवरी को पटना में जनसुनवाई, 4 से 10 फरवरी तक 'बेटी बचाओ- न्याय यात्रा' और 10 फरवरी को विधानसभा मार्च होगा, जिसमें जनता, महिला और छात्र संगठनों से शामिल होने की अपील की गई है।
यह यात्रा जहानाबाद से शुरू होकर नालंदा, नवादा, गया, औरंगाबाद, अरवल और पटना जिलों से गुजरेगी। उन्होंने आम जनता, महिला और छात्र संगठनों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील की।
माले महासचिव ने मांग की कि इस मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के किसी सीटिंग जज की प्रत्यक्ष निगरानी और निर्देशन में कराई जाये, ताकि निष्पक्ष, स्वतंत्र और भरोसेमंद जांच सुनिश्चित हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरू से ही बिहार सरकार और पुलिस- प्रशासन की भूमिका संदिग्ध और नकारात्मक रही है। पुलिस का रवैया मामले को दबाने, बलात्कार- हत्या जैसी गंभीर सच्चाई से इनकार करने और प्रभावशाली आरोपियों को बचाने वाला रहा है। ऐसे में राज्य की एजेंसियों पर न्याय की जिम्मेदारी छोड़ना पीड़ित परिवार और समाज के साथ अन्याय होगा।
उन्होंने कहा कि जांच एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पूरी की जानी चाहिये, ताकि न्याय में अनावश्यक देरी न हो। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जायें।
इससे पहले माले महासचिव जहानाबाद जिले पहुंचे, जहां उन्होंने पीड़ित छात्रा के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें न्याय की लड़ाई में पार्टी और जनआंदोलनों के पूर्ण समर्थन का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि बिहार की बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और न्याय की लड़ाई है, जिसे निर्णायक अंजाम तक पहुंचाया जायेगा।
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