लखनऊ , अक्टूबर 27 -- उत्तर प्रदेश में जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने सख्त रुख अपनाते हुए नौ जिलों के 10 थानाध्यक्षों को प्रत्यावर्तित करने और उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सितंबर में अगस्त की तुलना में शिकायतों में अत्यधिक वृद्धि वाले थानों की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के क्रम में डीजीपी ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर जनशिकायतों के निस्तारण की समीक्षा की। बैठक में जोनल एडीजी, पुलिस आयुक्त, परिक्षेत्रीय आईजी-डीआईजी तथा एसएसपी-एसपी शामिल हुए। डीजीपी ने निर्देश दिया कि शिकायतकर्ताओं को समाधान के लिए जिला या पुलिस मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें और थाने-चौकी स्तर पर ही उनकी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही के मामले में खीरी के मैलानी और फरधान, उन्नाव के सोहरामऊ, एटा के जसरथपुर, आगरा के लोहामंडी, प्रतापगढ़ के महेशगंज, बदायूं के उसावा, बिजनौर के चांदपुर, मथुरा के जैत और लखनऊ के बाबू बनारसीदास थाने के थानाध्यक्षों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

डीजीपी ने आईजीआरएस, जनसुनवाई, मुख्यमंत्री संदर्भ और पीजी पोर्टल समेत सभी माध्यमों से मिलने वाली शिकायतों को गंभीरता से सुनने तथा किसी भी शिकायत को दर्ज करने से इनकार नहीं करने का निर्देश दिया। प्रत्येक शिकायत के निस्तारण की समय-सीमा निर्धारित करने, लंबित रहने का कारण दर्ज करने और शिकायतकर्ता को कार्रवाई की स्थिति से अवगत कराने पर जोर दिया गया।

शिकायतों की दैनिक निगरानी के लिए प्रत्येक एसएसपी-एसपी कार्यालय में केंद्रीय निगरानी डेस्क स्थापित की जाएगी। यह डेस्क प्राप्त, निस्तारित और लंबित शिकायतों का रिकॉर्ड रखेगी तथा संबंधित थानों और चौकियों से नियमित संपर्क कर कार्रवाई की प्रगति की जानकारी लेगी।

भूमि विवादों के प्रभावी निस्तारण के लिए प्रत्येक थाने को अपने क्षेत्र के 10 प्रमुख लंबित विवादों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित एसीपी या सीओ इन मामलों की निगरानी करेंगे और एसडीएम सहित राजस्व अधिकारियों के साथ समन्वय कर समाधान सुनिश्चित करेंगे। सूची में शामिल विवादों का निस्तारण होने के बाद अगले 10 विवादों को उसमें शामिल किया जाएगा।

यक्ष बीट रिपोर्ट में दर्ज भूमि विवादों को भी संबंधित थाने की विवाद सूची और निगरानी व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। विवादों की गंभीरता का आकलन कर समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पूर्व में मारपीट, दोनों पक्षों की ओर से मुकदमे दर्ज होने अथवा जातिगत-सांप्रदायिक संवेदनशीलता वाले मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

डीजीपी ने कहा कि थाने या चौकी पर आने वाले प्रत्येक फरियादी की बात सम्मानपूर्वक और धैर्य से सुनी जाए। अभद्र व्यवहार, पक्षपात, अनावश्यक टालमटोल या भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

संवेदनशील विवादों की निगरानी थाना, सर्किल और जनपद स्तर पर प्रतिदिन की जाएगी। शांति भंग की आशंका वाले मामलों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों के तहत समय से निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

डीजीपी ने सभी जनपदीय पुलिस प्रभारियों को थाने और चौकी स्तर पर लंबित जनशिकायतों, उनके लंबित रहने के कारणों तथा जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की समीक्षा कर तीन दिनों के भीतर रेंज और जोन के माध्यम से अनुपालन आख्या भेजने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि जनशिकायतों का समयबद्ध, निष्पक्ष और संवेदनशील निस्तारण पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अधिकारियों को शिकायतकर्ताओं को न्यायोचित सहायता उपलब्ध कराने और संभावित विवादों में समय रहते कार्रवाई कर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

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