नयी दिल्ली , अप्रैल 08 -- सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने रक्षा क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता के प्रमुख स्तंभ बेंगलुरु स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) का बुधवार को दौरा किया और स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर 'प्रचंड' में उडान भरी।
सेना के अनुसार जनरल द्विवेदी ने स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमताओं और सेना की विमानन परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्नत लाइट हेलिकॉप्टर (एएलएच) ध्रुव और हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर (एलसीएच) प्रचंड जैसे प्रमुख प्लेटफार्मों के साथ-साथ सेना के विमानन संसाधनों के उन्नयन, रखरखाव और उत्पादन तंत्र को प्रदर्शित किया गया, जो इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।
इस दौरान सेना प्रमुख ने प्रचंड में उडान भरी जिससे उन्हें उसके उत्कृष्ट प्रदर्शन और युद्ध क्षमता का प्रत्यक्ष अनुभव मिला। यह उडान प्लेटफार्म की संचालनात्मक प्रभावशीलता और सामरिक युद्धक्षेत्र में निर्णायक हवाई शक्ति प्रदान करने की उसकी महत्वपूर्ण भूमिका की स्पष्ट पुष्टि के साथ ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारतीय सेना की निरंतर पहल को भी मजबूत करती है।
आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन, लूटरिंग म्यूनिशन्स, मानवरहित हवाई प्रणालियों और ड्रोन रोधी प्रणाली की बढ़ती उपस्थिति ने युद्धक्षेत्र को भूमि से ऊपर निम्न-उच्चता वाले हवाई क्षेत्र तक विस्तारित कर दिया है। इसने एयर लिटोरल को विशेष संचालन केन्द्र में ला दिया है। हाल के संघर्षों ने यह दिखाया है कि इस क्षेत्र में प्रभुत्व सीधे जमीनी युद्धों की गति, सक्रिय बने रहने की क्षमता और परिणामों को प्रभावित करता है, जिससे सैन्य बलों द्वारा त्वरित, स्थानीय नियंत्रण और प्रतिक्रिया आवश्यक हो जाती है। इसी संदर्भ में प्रचंड का महत्व बढ़ जाता है। तेज, सटीक और सभी प्रकार की भौगोलिक परिस्थितियों में संचालन के लिए अनुकूल प्रचंड भारतीय सेना के लिए निचले-हवाई क्षेत्र में निर्णायक भूमिका में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
देश का पहला स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किया गया यह हेलीकॉप्टर विशेष रूप से अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में युद्ध के लिए बनाया गया है और 6,000 मीटर से अधिक की दुर्लभ परिस्थितियों में प्रभावी संचालन कर सकता है। इसके उन्नत एवियोनिक्स, सटीक हथियार और सक्रिय रहने की विशेषताएं इसे क्लोज एयर सपोर्ट, एंटी-आर्मर मिशन और सशस्त्र टोही जैसी भूमिकाओं के लिए आदर्श बनाती हैं।
सेना प्रमुख की यह उडान उस व्यापक परिवर्तन को दर्शाती है जो स्वदेशी क्षमता, नेतृत्व की मंशा और बदलती युद्धनीति का समावेश कर भारतीय सेना को एयर लिटोरल युद्धक्षेत्र में परिणामों को आकार देने वाली प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करता है।
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