नयी दिल्ली , जून 28 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनभागीदारी को किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा है कि जब देशवासी किसी संकल्प के साथ आगे बढ़ते हैं तो कोई भी शक्ति उन्हें अपने लक्ष्य से डिगा नहीं सकती।
प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के दौरान अपनी अपीलों पर देशवासियों की सक्रिय भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों ने जिस तरह सहयोग किया, वह राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी की शक्ति का सशक्त उदाहरण है।
श्री मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' के 135वीं कड़ी में कहा कि राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी भारत की सबसे बड़ी पूंजी है और इसका अनुभव देश बार-बार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में बनी युद्ध जैसी परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने देशवासियों से कुछ समय के लिए सोना खरीदने से बचने, विदेश में छुट्टियां मनाने को टालने, कार पूलिंग को बढ़ावा देने तथा किसानों से रासायनिक उर्वरकों के बजाय प्राकृतिक खाद के अधिक उपयोग का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि देशवासियों ने उनकी अपील का न केवल समर्थन किया, बल्कि उसे व्यवहार में भी उतारा। अनेक परिवारों ने संदेश भेजकर बताया कि वे विवाह समारोह में नया सोना नहीं खरीदेंगे और आवश्यकता पड़ने पर पुराने आभूषणों को पुनर्चक्रित कर उपयोग करेंगे। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर विदेश यात्राएं स्थगित करने की जानकारी भी साझा की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कार पूलिंग को लेकर भी लोगों ने अपने अनुभव साझा किए हैं। जो लोग पहले अलग-अलग वाहनों से एक ही दिशा में जाते थे, वे अब साथ यात्रा कर रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग बस और मेट्रो का उपयोग कर रहे हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल की बचत हो रही है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से प्राकृतिक खाद के उपयोग में वृद्धि की खबरें भी मिल रही हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक संकट का सामना भारत जनभागीदारी की ताकत से मिलकर कर रहा है।
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