जालोर , जून 22 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि मुख्यमंत्री के पास चौपाल के जरिए जनता से सीधा फीडबैक आने पर ही प्रदेश और गांव का भला हो सकता है।
श्री गहलोत ने सोमवार को जालोर में मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री की चौपाल के संबंध में किये गये सवाल के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा, "ग्रामीण जनता को यह भरोसा होना चाहिए कि 'हमने मुख्यमंत्री से बात की, उन्होंने तुरंत आदेश दिया और हमारा काम हो गया।' आज धरातल पर वैसी चौपालें नहीं हो रही हैं, यही मेरी मुख्य शिकायत है।"उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी कहा है कि असली 'चौपाल' का मतलब होता है कि पहले गांव में बाकायदा सूचना दी जाए कि आज इतने बजे मुख्यमंत्री की चौपाल होने वाली है। गांव के सभी लोग, जिनकी परेशानियां हैं, तकलीफ़ें हैं, समस्याएं हैं, वे सब वहां खुलकर आये। कोई ज्ञापन दे रहा हो, कोई अपनी बात बता रहा हो और मुख्यमंत्री वहीं अधिकारियों को समाधान के निर्देश दे रहे हो, इसे कहते हैं असली चौपाल।
श्री गहलोत ने कहा कि वहां तो चुनिंदा लोगों को बुलाया जा रहा है, जो न तो कोई सवाल पूछ सकते हैं, न कोई ज्ञापन दे सकते हैं, न अपनी समस्याओं पर चर्चा कर सकते हैं और न ही कोई ज़मीनी फीडबैक दे सकते हैं। असली चौपाल का मकसद ही यह होता है कि गांव के लोग सरकार और नीतियों के बारे में क्या सोचते हैं, उनकी क्या समस्याएं हैं और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है, इसका पता चले।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव न करवाये जाने तथा बजट में कटौती किए जाने को लेकर किये गये सवाल पर श्री गहलोत ने कहा कि इस कदम की तो पूरे प्रदेशवासियों को एक सुर में निंदा करनी चाहिए, क्योंकि संविधान के दायरे में समय पर चुनाव कराना बेहद आवश्यक है।
श्री गहलोत ने आरोप लगाते हुए कहा कि आज की सरकार को यह चिंता सता रही है कि वे नगर निकायों और पंचायतों के चुनावों में पूरी तरह साफ़ हो जायेंगे। इसी हार के डर से उच्च न्यायालय और उच्चत्तम न्यायालय के निर्देशों के बावजूद ये चुनाव नहीं करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब संविधान की मर्यादा को ही नहीं माना जा रहा है तो सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है और यह सरकार नैतिक रूप से बर्खास्त करने लायक है।
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