वाराणसी , जुलाई 15 -- जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार और सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के बीच जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशेष प्रमाणपत्र एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के संचालन और क्रियान्वयन को लेकर बुधवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
नई दिल्ली में जनजातीय कार्य मंत्रालय में आयोजित समारोह में मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा, संयुक्त सचिव अनंत प्रकाश पाण्डेय, निदेशक दीपाली मसीर्कर तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा उपस्थित रहे। समझौते के तहत विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सहयोग से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानकों के अनुरूप प्रमाणपत्र एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुख एवं कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है, साथ ही उनकी सांस्कृतिक पहचान, मातृभाषाओं और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण करना भी है।
मंत्रालय के अनुसार इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से जनजातीय युवाओं में आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, राष्ट्रबोध तथा जीवन-कौशल का विकास किया जाएगा। इसके साथ ही कला, शिल्प, लोकज्ञान और अन्य व्यावहारिक प्रशिक्षण के जरिए उनकी प्रतिभा को निखारने पर भी विशेष जोर रहेगा।
प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप शिक्षा को स्थानीय संस्कृति, मातृभाषा, कौशल विकास और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे जनजातीय युवाओं को नए अवसर मिलेंगे और वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए विकसित भारत के निर्माण में प्रभावी योगदान दे सकेंगे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित