भोपाल , अप्रैल 30 -- मध्यप्रदेश में जनगणना-2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 1 मई से प्रारंभ होकर 30 मई 2026 तक किया जाएगा। इस व्यापक अभियान के लिए प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं, जबकि स्वगणना के तहत अब तक 5 लाख 81 हजार 152 परिवार अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करा चुके हैं।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस संबंध में सभी संभागायुक्तों, जिला कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कार्ययोजना, डेटा संग्रहण प्रक्रिया, तकनीकी व्यवस्थाओं और निगरानी तंत्र पर विस्तार से चर्चा की गई और निर्देश दिए गए कि गणना कार्य में किसी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
वही भोपाल में प्रेसवार्ता के दौरान प्रभारी जनगणना निदेशक कार्तिकेया गोयल ने बताया कि इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होगी। प्रगणक मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए घर-घर जाकर प्रत्येक मकान, परिवार और संरचना से संबंधित जानकारी दर्ज करेंगे, वहीं कार्य की निगरानी भी डिजिटल प्रणाली से की जाएगी। इसके लिए प्रदेशभर में करीब 1 लाख 70 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जिनमें प्रगणक और सुपरवाइजर की बड़ी संख्या शामिल है। साथ ही लगभग 1 लाख 37 हजार मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं।
जबकि बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी प्रगणकों और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण पूर्ण होने के साथ उन्हें फील्ड की व्यावहारिक चुनौतियों के लिए भी तैयार किया जाए तथा सभी को फोटोयुक्त पहचान-पत्र जारी किए जाएं। नागरिकों से अपील की गई है कि वे केवल अधिकृत पहचान-पत्र वाले कर्मचारियों को ही जानकारी उपलब्ध कराएं।
शहरी क्षेत्रों, गेटेड कॉलोनियों और अपार्टमेंट परिसरों में गणना कार्य के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी और जनजागरूकता के माध्यम से लोगों को अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि कोई भी परिवार गणना से वंचित न रहे और दोहरी गणना जैसी त्रुटियों से बचा जा सके।
प्रभारी जनगणना निदेशक कार्तिकेया गोयल ने स्पष्ट किया है कि जनगणना अधिनियम के तहत एकत्रित सभी जानकारी पूर्णतः गोपनीय रहेगी और इसका उपयोग केवल विकास योजनाओं के निर्माण में किया जाएगा। इन आंकड़ों का उपयोग कर, पुलिस या किसी जांच में नहीं किया जा सकता और न ही इन्हें साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
फर्जी खबरों और अफवाहों पर निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। जनगणना से संबंधित जानकारी और सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 उपलब्ध रहेगा। अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे समन्वय और जिम्मेदारी के साथ इस कार्य को निर्धारित समय-सीमा में सफलतापूर्वक पूर्ण करें।
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