चंडीगढ़ , अप्रैल 23 -- वरिष्ठ समाजसेवी और लक्ष्मीकांता चावला ने आगामी जनगणना से पहले देशवासियों, विशेषकर पंजाब के लोगों से अपील की है कि वे अपनी ज्ञात भाषाओं में संस्कृत को भी अवश्य शामिल करें।

उन्होंने कहा कि जब सरकार नागरिकों से यह जानकारी लेगी कि वे कौन-कौन सी भाषाएं जानते हैं, तो हिंदी, पंजाबी या अंग्रेजी के साथ संस्कृत का उल्लेख करना राष्ट्रहित और सांस्कृतिक पहचान के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि भले ही कई लोगों ने संस्कृत औपचारिक रूप से नहीं पढ़ी हो, लेकिन धार्मिक प्रार्थनाओं, मंत्रों और जीवन के विभिन्न संस्कारों जन्म से लेकर विवाह और अंतिम संस्कार में संस्कृत का व्यापक उपयोग होता है।

पूर्व मंत्री ने कहा कि भारतीय परंपरा में 16 संस्कारों का निर्वहन प्रायः संस्कृत में ही होता है और हर आयु वर्ग के लोग किसी न किसी रूप में इस भाषा से जुड़े हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे जनगणना के दौरान संस्कृत के ज्ञान का उल्लेख कर अपनी सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाएं।

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