कोलकाता , मई 29 -- पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में 15 वर्ष बाद शुरू होने जा रही जनगणना-2027 की तैयारियों का शुभारंभ करते हुए शुक्रवार को कहा कि राज्य की बंगलादेश से लगी लंबी सीमा और बदलती जनसांख्यिकी के कारण यह जनगणना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया अवैध घुसपैठियों की पहचान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

श्री अधिकारी ने नवान्न में प्रधान जनगणना अधिकारियों (पीसीओ) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों से बंगलादेश सीमा क्षेत्रों में लोगों की वापसी की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा, "वे भारतीय नहीं हैं और यदि उनके नाम जनगणना में दर्ज होने हैं तो उन्हें आवश्यक जानकारी और दस्तावेज देने होंगे। इसलिए हमारे राज्य के लिए जनगणना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां की जनसांख्यिकी में बड़ा बदलाव आया है।"मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती राज्य सरकार के दौरान जनगणना प्रक्रिया बाधित रही। उन्होंने कहा कि राज्य की बंगलादेश से लंबी सीमा है और कई क्षेत्रों में सीमा पर बाड़ नहीं लग पायी। उन्होंने कहा, "पूर्ववर्ती सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भूमि उपलब्ध नहीं कराई, जिसके कारण राज्य की जनसांख्यिकी में काफी बदलाव आया है।"श्री अधिकारी ने जनगणना में व्यापक जनभागीदारी की अपील करते हुए कहा कि पहली बार यह प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी और लोगों को स्वयं गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का अवसर भी मिलेगा। उन्होंने कहा, "मैं सभी लोगों से इस जनगणना में भागीदारी और सहयोग की अपील करता हूं।"बैठक के साथ राज्य में 15 वर्ष बाद जनगणना कार्यों की औपचारिक शुरुआत हुई। पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। जनगणना संचालन निदेशालय के अधिकारियों के अनुसार राज्य के निवासी एक अगस्त से 15 अगस्त तक स्वयं ऑनलाइन माध्यम से अपनी जनगणना संबंधी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। यह 15 दिवसीय ऑनलाइन प्रक्रिया घर-घर जाकर किए जाने वाले सर्वेक्षण से पहले आयोजित की जाएगी।

श्री अधिकारी ने बताया कि इच्छुक नागरिक आधिकारिक स्व-गणना पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि डिजिटल विकल्प चुनने वाले परिवारों के लिए गणनाकर्मियों द्वारा पूरी जानकारी दोबारा एकत्र करने की आवश्यकता नहीं होगी।

अधिकारियों के अनुसार यह सुविधा पहली बार उपलब्ध कराई जा रही है। नागरिक अपने मोबाइल नंबर और अन्य बुनियादी विवरणों के माध्यम से पोर्टल पर लॉग इन कर परिवार संबंधी जानकारी भर सकेंगे। सफल पंजीकरण के बाद उन्हें एक विशिष्ट स्व-गणना पहचान संख्या (एसई आईडी) प्रदान की जाएगी।

यह एसई आईडी बाद में सत्यापन के दौरान गणनाकर्मियों को दिखानी होगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन प्रणाली के साथ-साथ पारंपरिक घर-घर जाकर जनगणना की प्रक्रिया भी जारी रहेगी। पूर्व की तरह गणनाकर्मी अपने निर्धारित क्षेत्रों में जाकर परिवारों से जानकारी एकत्र करेंगे। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी होगी जो डिजिटल तकनीक के उपयोग में सहज नहीं हैं।

जनगणना संचालन निदेशालय के बयान के अनुसार जनगणना-2027 पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित होगी। गणनाकर्मी स्मार्टफोन आधारित मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग कर सीधे आंकड़े एकत्र और अपलोड करेंगे। स्व-गणना पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन हिंदी और अंग्रेजी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध होंगे। ऑनलाइन स्व-गणना का विकल्प चुनने वाले लोगों को अपनी भौगोलिक स्थिति डिजिटल मानचित्र पर भी चिह्नित करनी होगी।

भारत की जनगणना जनगणना अधिनियम 1948 तथा समय-समय पर संशोधित जनगणना नियम 1990 के तहत आयोजित की जाती है। जनगणना-2027 देश की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद की आठवीं जनगणना होगी। पूरी प्रक्रिया 20 फरवरी, 2027 तक पूर्ण कर ली जाएगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित