बेंगलुरु , अगस्त 23 -- कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रस्तावित जगलूर से बल्लारी तक 170 किलोमीटर लंबी पदयात्रा अब बड़े राजनीतिक अभियान का रूप लेती दिखाई दे रही है।

इसके जरिए भाजपा 2023 के विधानसभा चुनाव में लगभग पूरी तरह हाथ से निकल गये अनुसूचित जनजाति (एसटी) बहुल क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ फिर से मजबूत करने की कोशिश में है।

प्रस्तावित 20 दिवसीय पदयात्रा करीब 11 आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इस दौरान भाजपा उस क्षेत्र में अपना अभियान पहुंचाएगी, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मजबूत राजनीतिक आधार बनाया है।

इस क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण भाजपा की दिलचस्पी को स्पष्ट करते हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जगलूर, कुदलिगी, मोलकलमुरु, चल्लकेरे, कांपली, सिरुगुप्पा, बल्लारी ग्रामीण और संदूर समेत जगलूर-बल्लारी क्षेत्र के प्रमुख एसटी आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों में जीत दर्ज की थी। वहीं, व्यापक आरक्षित क्षेत्र में भाजपा को सीमित सफलता ही मिली थी।

भाजपा को सबसे बड़ा झटका बल्लारी जिले में लगा था, जहां 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सभी पांच विधानसभा सीटों पर कब्जा कर लिया था। इस तरह जिले में भाजपा का एक भी विधायक नहीं चुना गया।

इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में प्रस्तावित पदयात्रा का महत्व बढ़ जाता है। यात्रा की तत्काल मांग कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित अनियमितताओं को लेकर मंत्री नागेंद्र का इस्तीफा है। हालांकि, इसके पीछे भाजपा का व्यापक राजनीतिक उद्देश्य एसटी मतदाताओं के बीच दोबारा संपर्क स्थापित करना और उस क्षेत्र में पार्टी संगठन को मजबूत करना है, जहां कांग्रेस ने महत्वपूर्ण बढ़त हासिल की है।

जगलूर को यात्रा का शुरुआती बिंदु और बल्लारी को अंतिम पड़ाव चुना जाना महज भौगोलिक फैसला नहीं माना जा रहा है। प्रस्तावित मार्ग कई आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। इससे भाजपा को उस मतदाता वर्ग तक सीधे पहुंचने का अवसर मिलेगा, जो वाल्मीकि निगम विवाद के राजनीतिक केंद्र में है।

भाजपा ने पहले पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु के नेतृत्व में देवदुर्ग से बल्लारी तक पदयात्रा निकालने पर विचार किया था। हालांकि, पार्टी के भीतर इस बात को लेकर मतभेद सामने आए कि किसी एक नेता के नेतृत्व में पदयात्रा होने से उसे व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ मिल सकता है। इससे यह धारणा भी बन सकती थी कि यह एसटी समुदाय के कुछ वर्गों से जुड़ा व्यक्तिगत राजनीतिक टकराव है।

अब पार्टी सामूहिक नेतृत्व में पदयात्रा निकालने पर विचार कर रही है। इसके तहत पार्टी के एसटी नेताओं को एक मंच पर लाने और आंदोलन को व्यापक संगठनात्मक अभियान में बदलने की कोशिश की जाएगी।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र के नयी दिल्ली जाकर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद पदयात्रा की तारीखों की घोषणा जल्द किए जाने की संभावना है।

पदयात्रा का समय भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। मौजूदा विधानसभा सत्र में भाजपा ने श्री नागेंद्र के इस्तीफे को अपनी प्रमुख मांग बना रखा है। प्रस्तावित पदयात्रा के जरिए पार्टी इस मुद्दे को विधानसभा से बाहर निकालकर सीधे संबंधित विधानसभा क्षेत्रों और मतदाताओं के बीच ले जा सकेगी।

भाजपा की रणनीति केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं दिखती। पार्टी वाल्मीकि निगम विवाद को व्यापक राजनीतिक मुद्दे में बदलने, आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों में अपने संगठन को फिर से सक्रिय करने और कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपने अभियान की चुनावी स्वीकार्यता परखने की कोशिश कर रही है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित