बैतूल , अगस्त 03 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में जंगल सत्याग्रह के महानायक एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सरदार गंजनसिंह कोरकू की स्मृति में सोमवार को श्रद्धांजलि सभा एवं भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोगों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों तथा युवाओं ने भाग लेकर उनके योगदान को स्मरण किया।
शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से निकाली गई, जिसमें पारंपरिक वेशभूषा में शामिल लोगों ने ढोल, नगाड़ों और मांदल की थाप पर जनजातीय लोकनृत्य प्रस्तुत किए। पूरे आयोजन के दौरान जनजातीय संस्कृति और देशभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।
इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने वर्ष 1930 के ऐतिहासिक जंगल सत्याग्रह को स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण अध्याय बताते हुए कहा कि अंग्रेजी शासन के दमनकारी वन कानूनों के विरुद्ध आदिवासी समाज ने संगठित होकर संघर्ष किया था। इस आंदोलन का नेतृत्व सरदार गंजनसिंह कोरकू ने किया, जिन्होंने वन अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ देश की आजादी के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वक्ताओं ने कहा कि सरदार गंजनसिंह कोरकू ने आदिवासी समाज को संगठित कर अन्यायपूर्ण नीतियों का साहसपूर्वक विरोध किया और जंगल सत्याग्रह को राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन का सशक्त जनआंदोलन बनाया। उनके संघर्ष ने जनजातीय समाज में स्वाभिमान और स्वतंत्रता की भावना को मजबूत किया।
सभा में जनजातीय वीरों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा उनके इतिहास के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान को उचित सम्मान और पहचान मिलनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता संग्राम के ज्ञात और अज्ञात शहीदों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर देश की एकता, अखंडता और जनजातीय गौरव को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
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