पटना , जून 02 -- बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने राज्य सरकार की ओर से दस से कम कर्मचारियों वाले दुकानों एवं प्रतिष्ठानों के लिए निबंधन की अनिवार्यता समाप्त किए जाने के निर्णय का स्वागत किया है। चैम्बर के अध्यक्ष पी. के. अग्रवाल ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि पहले एक या दो कर्मचारियों वाले छोटे दुकानदारों को भी निबंधन कराना अनिवार्य था। अब बिहार दुकान और प्रतिष्ठान (रोजगार विनियमन और सेवा शर्त अधिनियम, 2025) को निरस्त किए जाने के बाद केवल दस या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को ही निबंधन कराना होगा।उन्होंने कहा कि इस फैसले से विशेष रूप से छोटे और कम पढ़े-लिखे व्यवसायियों को राहत मिलेगी, जो अपनी आजीविका के लिए छोटे प्रतिष्ठान संचालित करते हैं। इससे उनका प्रशासनिक बोझ कम होगा और व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार के साथ रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।
श्री अग्रवाल ने बताया कि चैम्बर ने 25 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, श्रम संसाधन एवं प्रवासी कल्याण मंत्री तथा विभागीय सचिव को पत्र लिखकर मांग की थी कि दिल्ली की तर्ज पर बिहार में भी छोटे दुकानदारों को श्रम कानूनों से संबंधित जटिल अनुपालनों में राहत दी जाए। उनका कहना था कि लाखों छोटे व्यवसायियों के लिए ऐसे नियमों का पालन करना कठिन होता है।उन्होंने कहा कि चैम्बर ने 20 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को राहत देने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने फिलहाल दस कर्मचारियों तक के प्रतिष्ठानों को यह सुविधा प्रदान की है, जो स्वागत योग्य कदम है। इसके लिए चैम्बर ने राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है।
चैम्बर अध्यक्ष ने कहा कि सरकार से पुनः अनुरोध किया गया है कि निबंधन की अनिवार्यता की सीमा को 10 से बढ़ाकर 20 कर्मचारियों तक किया जाए। इससे सूक्ष्म एवं छोटे उद्यमों को नियामकीय जटिलताओं से और अधिक राहत मिलेगी, व्यापार सुगमता को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार का यह निर्णय बिहार के व्यापारिक समुदाय के लिए लाभकारी सिद्ध होगा और राज्य के व्यवसायियों को देश में लागू हो रहे प्रगतिशील आर्थिक सुधारों के अनुरूप आगे बढ़ने में मदद करेगा।
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