नयी दिल्ली , जून 16 -- सरकार ने कहा है कि छोटे गांवों में भी खांसी की दवाइयों के सीरप की बिक्री और वितरण केवल विधिवत लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों के माध्यम से ही किया जा सकेगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने खांसी की दवाइयों की बिक्री और वितरण पर नियामक नियंत्रण को और सख्त करते हुए औषधि नियम, 1945 में महत्वपूर्ण संशोधन अधिसूचित किया है।

मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि जारी अधिसूचना के तहत अनुसूची 'के' की प्रविष्टि संख्या 13 से "सीरप" शब्द हटा दिया गया है, जिससे छोटे गांवों में खांसी की दवाइयों की बिक्री को दी गई विशेष छूट समाप्त हो गयी है। उन्होंने कहा कि इससे पहले 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में खांसी की दवाइयों की बिक्री के लिए खुदरा बिक्री लाइसेंस संबंधी कुछ प्रावधानों से छूट प्राप्त थी। इस व्यवस्था के तहत निर्धारित शर्तों के साथ बिना पूर्ण लाइसेंस प्रक्रिया के भी इन दवाओं की बिक्री संभव थी , हालांकि संशोधन के बाद खांसी की दवाइयों के सीरप इस छूट के दायरे से बाहर हो गये हैं।

नए नियमों के तहत अब छोटे गांवों में भी खांसी की दवाइयों के सीरप की बिक्री और वितरण केवल विधिवत लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों के माध्यम से ही किया जा सकेगा। मंत्रालय का कहना है कि यह कदम दवाओं के निर्माण, वितरण और बिक्री पर निगरानी मजबूत करने तथा जनस्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप नियामक ढांचे को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने उम्मीद जतायी है कि इस संशोधन से खांसी की दवाइयों का जिम्मेदार और सुरक्षित वितरण सुनिश्चित होगा तथा पूरे देश में औषधि संबंधी नियमों का बेहतर अनुपालन हो सकेगा। मंत्रालय ने निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 तथा औषधि नियम, 1945 के तहत लागू सभी लाइसेंसिंग और नियामक प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने की सलाह दी है।

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