लखनऊ , अक्टूबर 27 -- उत्तर प्रदेश में पशुपालन को किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार एवं उद्यमिता का माध्यम बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य पशुधन मिशन (एसएलएम) को मंजूरी दे दी गई।
मिशन के जरिए प्रदेश की पशुधन अर्थव्यवस्था को संगठित कर आधुनिक तकनीक, उद्यमिता, नवाचार और वैश्विक बाजार से जोड़ने की तैयारी है। इसमें खास तौर पर लघु एवं सीमांत किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण उद्यमियों पर फोकस किया जाएगा।
पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक पशुधन वाला राज्य है और दुग्ध उत्पादन में भी प्रदेश पहले स्थान पर है।
उन्होंने बताया कि अब सरकार का जोर पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही बाजार व्यवस्था, मूल्य संवर्धन, डिजिटल प्रबंधन और पशुधन आधारित उद्यमों को मजबूत करने पर है। मिशन के माध्यम से पशुपालकों को बेहतर नस्ल, तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में पहली बार राज्य पशुधन मिशन को मंजूरी दी गई है। इसके तहत साहीवाल, देसी और हरियाणवी जैसी उन्नत नस्लों के विकास और नस्ल सुधार को प्रोत्साहित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि उन्नत गाय पालन के लिए भी आर्थिक सहायता का प्रावधान है। एक उन्नत गाय के लिए 40 हजार रुपये और दो गायों के लिए 80 हजार रुपये तक अनुदान दिया जाएगा। इसके साथ ही बकरी, भेड़, शूकर और मुर्गी पालन को भी बढ़ावा दिया जाएगा। जरूरतमंद परिवारों को 100-100 चूजे उपलब्ध कराने की योजना भी संचालित की जा रही है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हो सकें।
राज्य पशुधन मिशन को पांच प्रमुख उप-मिशनों के जरिए लागू किया जाएगा। इनमें पशुधन उद्यमिता एवं स्टार्टअप विकास, पशुधन एवं पोल्ट्री नस्ल विकास, नवाचार एवं डिजिटल लाइवस्टॉक, चारा एवं आहार विकास तथा अनुसंधान, वैश्वीकरण एवं ज्ञान प्रणाली विकास शामिल हैं।
इन उप-मिशनों के माध्यम से लाइवस्टॉक स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने के साथ चारा उत्पादन, पशुधन उत्पादों के मूल्य संवर्धन, उत्पादक संगठनों और सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा। इससे पशुपालकों को उत्पादन से लेकर बाजार तक बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की कोशिश होगी।
मिशन के तहत पशुपालन क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। डिजिटल ट्रेसबिलिटी के माध्यम से पशुधन और पशुधन उत्पादों की निगरानी एवं गुणवत्ता व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर रहेगा। इसके अलावा जलवायु अनुकूल तकनीकों को अपनाकर पशुधन क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और उत्पादक बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य पशुधन उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ उन्हें बड़े बाजारों तक पहुंचाना है। इसके लिए पशुपालकों और ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण देकर उनके कौशल का विकास भी किया जाएगा। पशुधन मंत्री ने बताया कि राज्य पशुधन मिशन राज्य वित्तपोषित योजना होगी। निर्धारित माइलस्टोन पूरे करने, स्क्रीनिंग समिति की प्रक्रिया और पीएसी की स्वीकृति के बाद चयनित परियोजनाओं को अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। अनुदान की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।
इसके अलावा पशुधन क्षेत्र में अवसंरचना निर्माण और विभिन्न सेवाओं के विकास के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे निजी निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ पशुपालन क्षेत्र में नई तकनीक, रोजगार और उद्यमिता के अवसर पैदा होंगे।
राज्य पशुधन मिशन के जरिए सरकार की कोशिश पशुपालन को केवल पारंपरिक आजीविका तक सीमित रखने के बजाय इसे आधुनिक और संगठित आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की है। छोटे किसानों और ग्रामीण परिवारों को पशुधन आधारित आय के नए अवसर देने के साथ युवाओं को स्टार्टअप और उद्यमिता से जोड़ने पर जोर रहेगा। नस्ल सुधार, चारा प्रबंधन, डिजिटल तकनीक, मूल्य संवर्धन और बेहतर बाजार व्यवस्था के जरिए प्रदेश के पशुधन क्षेत्र को नई दिशा देने की तैयारी है।
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