खैरागढ़ , अक्टूबर 11 -- छत्तीसगढ़ में खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की जनपद पंचायत छुईखदान में 10 लाख 24 हजार रुपये के मरम्मत कार्य की स्वीकृति और बिना कार्यादेश निर्माण कराए जाने का मामला सामने आया है।
शिकायत के बाद संबंधित कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति निरस्त कर दी गई है। जिला पंचायत प्रशासन ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय दल गठित किया है, जो 14 अक्टूबर को कार्यस्थल का निरीक्षण करेगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत छुईखदान के कार्यालय भवन की मरम्मत के लिए 17 जुलाई 2026 को प्रस्ताव क्रमांक 04 पारित किया गया था। इससे पहले छह जुलाई को ग्रामीण यांत्रिकी सेवा द्वारा 10.24 लाख रुपये के कार्य की तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसके बाद 23 जुलाई को पत्र क्रमांक 2554 के माध्यम से प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई। कार्य के क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायत खैरा नवापारा को निर्माण एजेंसी बनाया गया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सात से 16 सितंबर के बीच बिना कार्यादेश जारी किए जनपद पंचायत कार्यालय परिसर में निर्माण सामग्री एकत्र की गई और भवन की छत तथा उसकी चारदीवारी में तोड़फोड़ कर छत की ढलाई कराई गई। आरोप है कि इस दौरान संबंधित उप अभियंता का तकनीकी मार्गदर्शन भी नहीं लिया गया।
इस संबंध में 18 सितंबर को जिला प्रशासन के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई। शिकायत में जनपद पंचायत की प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी केश्वरी देवांगन की भूमिका और निर्माण कार्य की स्वीकृति प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए।
मामले को संज्ञान में लेते हुए जिला पंचायत खैरागढ़ ने 21 सितंबर को जनपद पंचायत से प्रतिवेदन मांगा। इसी दौरान निर्माण एजेंसी बनाई गई ग्राम पंचायत खैरा नवापारा ने तकनीकी एवं संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए कार्य करने में असमर्थता जताई।
इसके अगले दिन 22 सितंबर को प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी केश्वरी देवांगन ने आदेश क्रमांक 3373 जारी कर संबंधित कार्य की स्वीकृति निरस्त कर दी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आवंटित राशि को 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत वापस समायोजित करने की कार्रवाई भी की गई।
इस बीच शिकायतकर्ता ने प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति निरस्त किए जाने के अधिकार पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में इस कार्रवाई की वैधानिकता की जांच कराने की मांग की गई है।
जनपद पंचायत की ओर से 23 सितंबर को जिला पंचायत को भेजे गए प्रतिवेदन में बताया गया कि संबंधित कार्य के लिए कोई कार्यादेश जारी नहीं किया गया था और कार्य के मद में भुगतान की राशि शून्य दर्ज है। प्रतिवेदन में निर्माण कार्य जनप्रतिनिधियों द्वारा कराए जाने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, शिकायत के अनुसार, संबंधित जनप्रतिनिधियों के नाम, कार्य कराने की अनुमति और तकनीकी पर्यवेक्षण के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद जिला पंचायत खैरागढ़ ने 25 सितंबर को आदेश क्रमांक 1681 के माध्यम से दो सदस्यीय जांच दल गठित किया। जांच दल को निर्माण कार्य से संबंधित स्वीकृतियों, दस्तावेजों और कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जांच दल का 14 अक्टूबर को जनपद पंचायत कार्यालय भवन का निरीक्षण प्रस्तावित है। इस दौरान संबंधित अभिलेखों की जांच किए जाने की संभावना है।
मामले में शिकायतकर्ता ने निर्माण एजेंसी के चयन, बिना कार्यादेश निर्माण शुरू होने और स्वीकृति निरस्त करने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही यह स्पष्ट करने को कहा है कि बिना विधिवत कार्यादेश के निर्माण किसके निर्देश पर कराया गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
फिलहाल मामले में वित्तीय अनियमितता अथवा किसी अधिकारी की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण नहीं हुआ है। जांच दल की रिपोर्ट के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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