नयी दिल्ली , जुलाई 28 -- कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की नीतियों की वजह से छात्र युवाओं का व्यवस्था पर से भरोसा उठ गया है।
श्रीमती प्रियंका गांधी ने लोक सभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा में आरएमएल में भर्ती छात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उसकी मां की गुहार ने मुझे शर्मिंदा कर दिया। उन्होंने कहा मैं प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से पूछना चाहती हूं कि क्या जरूरत थी मासूम छात्रों पर लाठियां चलाने की। क्या जरूरत थी आंसू गैस और पैलेट गन चलाने की? क्या वो आतंकवादी थे? ये सवाल कांग्रेस नहीं देश की जनता पूछ रही है।पूरा देश पूछ रहा है कि किसने आदेश दिया छात्रों पर दमन करने की। पूरा देश जवाब माँग रहा है। हमारा संविधान सर्वोपरि है और इसको ध्वस्त करना पाप है।
उन्होंने कहा कि हजारों बच्चों ने अपने अधिकार के लिए आवाज उठाई क्योंकि उनको लगने लगा कि मेहनत से ज़्यादा बेईमानी हावी हैं। छात्रों ने अन्याय के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग की। छात्र अपने अधिकारों की माँग कर रहे थे लेकिन बदले में उनका दमन किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने रोजगार पैदा करने वाले सभी साधनों को कमज़ोर किया और दूसरी तरफ़ पेपर लीक पर कोई जवाबदेही नहीं है। इस सरकार की प्राथमिकता शिक्षा नहीं उद्योगपतियों का संरक्षण है।
श्रीमती गांधी ने कहा कि छात्रों का व्यवस्था पर से भरोसा उठ गया है। इतना होने के बाद भी सरकार समझ नहीं रही है और नये नये नैरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही है। सरकार को किस बात का अहंकार है, यह समझ से परे है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी जेन-जी का भरोसा जीतना चाहते हैं तो नए एंगल से वीडियो बनाने से काम नहीं चलेगा। कैमरे का एंगल नहीं, दिल का एंगल बदलना पड़ेगा। नौजवानों के साथ घोर अन्याय हुआ है। प्रधानमंत्री को अपनी जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी। सभी को साथ लेकर गहरी चर्चा करके एक नई शिक्षा नीति बनानी पड़ेगी। आरएसएस के लोगों पर जोर देने से काम नहीं चलेगा। अन्य विचारधारा के लोगों को भी जगह दीजिए। छात्रों को सड़क से हटाया जा सकता है,लेकिन उनकी जायज बातों से इनकार नहीं किया जा सकता।
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